Diabetes and CKD uACR
CKD ME uACR SE PATA LAGAYEN KIDNEY KITNI % KAAM KAR RAHI
“*क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) एक ऐसी स्थिति है जिसमें गुर्दे (Kidneys) धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं। इस वजह से शरीर में अपशिष्ट पदार्थ (Toxins) जमा होने लगते हैं और कई प्रकार की शारीरिक समस्याएं सामने आती हैं।*
GFR (किडनी कितने प्रतिशत काम कर रही है) किडनी कितने प्रतिशत काम कर रही है, यह जानने के लिए eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate) टेस्ट देखा जाता है। uACR टेस्ट का काम यह बताना है कि किडनी में कितना नुकसान या डैमेज हुआ है और यूरिन (पेशाब) के रास्ते कितना प्रोटीन (एल्ब्युमिन) बाहर निकल रहा है।
क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) की पूरी स्थिति समझने के लिए दोनों टेस्ट नीचे दिए गए तरीके से काम करते हैं
यह टेस्ट आपके खून में क्रिएटिनिन (Creatinine) के स्तर, उम्र और लिंग के आधार पर निकाला जाता है। इसे आप सीधे तौर पर किडनी का वर्किंग प्रतिशत मान सकते हैं:
- 90 या उससे ज्यादा: किडनी 90% से अधिक काम कर रही है (सामान्य)।
- 60 से 89: किडनी 60% से 89% काम कर रही है (हल्का नुकसान)।
- 30 से 59: किडनी 30% से 59% काम कर रही है (मध्यम नुकसान – स्टेज 3)।
- 15 से 29: किडनी 15% से 29% काम कर रही है (गंभीर नुकसान – स्टेज 4)।
- 15 से कम: किडनी 15% से कम काम कर रही है (किडनी फेलियर – स्टेज 5)।
uACR (किडनी में कितना डैमेज/लीकेज है)
यह एक यूरिन टेस्ट है जो बताता है कि किडनी के फिल्टर कितने खराब हुए हैं:
- 30 mg/g से कम: सामान्य (Normal)।
- 30 से 300 mg/g: किडनी में हल्का डैमेज (माइक्रोएल्ब्युमिनुरिया), जिससे प्रोटीन लीक हो रहा है।
- 300 mg/g से ज्यादा: किडनी में गंभीर डैमेज (मैक्रोएल्ब्युमिनुरिया)।
भारत में कितने प्रतिशत लोगों की किडनी प्रभावित है?
- कुल वयस्क आबादी (Adults): भारत में लगभग 15% से 17% वयस्क किसी न किसी स्तर की क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित हैं। हालिया अध्ययनों के अनुसार, 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में सीकेडी की व्यापकता लगभग 16.38% तक पहुंच गई है।
- किडनी फेलियर के नए मामले: भारत में हर साल 1 लाख से अधिक नए मरीज किडनी फेलियर (End-Stage Renal Disease) के अंतिम चरण में पहुँचते हैं, जिन्हें जीवित रहने के लिए डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है।
- वर्तमान में भारत में 10 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में किडनी की समस्या का सामना कर रहे हैं, और लगभग 5 लाख लोगों को नियमित डायलिसिस की आवश्यकता होती है।
2. किस उम्र में सबसे ज्यादा हो रही है किडनी फेल?
विकसित देशों (जैसे अमेरिका या यूरोप) की तुलना में भारत में लोग 15 साल पहले किडनी फेलियर का शिकार हो रहे हैं।
- मुख्य प्रभावित आयु वर्ग: भारत में सबसे ज्यादा किडनी फेलियर के मामले 40 से 70 वर्ष की आयु के बीच देखे जाते हैं। इस आयु वर्ग के लोग कुल किडनी मरीजों का लगभग 55% हिस्सा हैं।
- औसत आयु (Average Age): भारत में किडनी फेल होने या डायलिसिस की नौबत आने की औसतन उम्र 52 वर्ष है, जबकि पश्चिमी देशों में यह औसतन 67 वर्ष के बाद होती है।
- युवाओं में बढ़ता खतरा: आजकल अस्वस्थ जीवनशैली, गलत खान-पान और दर्द निवारक दवाओं (Painkillers) के अंधाधुंध उपयोग के कारण 30 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में भी किडनी फेलियर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
भारत में कम उम्र में किडनी फेल होने के मुख्य कारण:
- डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का अनियंत्रित होना: भारत को दुनिया की डायबिटीज राजधानी कहा जाता है। यह दोनों बीमारियाँ समय से पहले किडनियों को पूरी तरह नष्ट कर देती हैं।
- जागरूकता की कमी: शुरुआती स्टेज (स्टेज 1 से 3) में कोई दर्द या बड़ा लक्षण न होने के कारण लोग जांच नहीं करवाते। जब तक मरीज डॉक्टर के पास पहुँचता है, तब तक किडनी 80-90% फेल हो चुकी होती है।
क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) होने का मुख्य कारण क्या है?
ज़्यादातर मामलों में, किडनी खराब होने या डैमेज होने की मुख्य वजह डायबिटीज (मधुमेह) और हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) होती है।
- डायबिटीज (Diabetes): यह स्थिति तब पैदा होती है जब आपके खून में शुगर (ग्लूकोज) का स्तर बहुत अधिक हो जाता है। बढ़ा हुआ ब्लड शुगर आपके शरीर के कई अंगों और मांसपेशियों को नुकसान पहुँचाता है — जिसमें आपकी किडनियाँ और दिल के साथ-साथ रक्त वाहिकाएं (blood vessels), नसें (nerves) और आँखें भी शामिल हैं।
- हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure): इसे हाइपरटेंशन भी कहा जाता है। यह तब होता है जब आपकी रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर खून का दबाव बहुत बढ़ जाता है। यदि इसे नियंत्रित न किया जाए, तो हाई ब्लड प्रेशर के कारण दिल का दौरा (Heart Attack), स्ट्रोक (मस्तिष्क का दौरा) और क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) जैसी गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।
इसके अलावा किडनी खराब होने के अन्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे:
- ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (Glomerulonephritis): किडनी के अंदर मौजूद बारीक फिल्टर्स (Glomeruli) में सूजन आ जाना।
- पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (PKD): यह एक आनुवंशिक (जेनेटिक) बीमारी है, जिसमें किडनी में पानी की गांठें (Cysts) बनने लगती हैं।
- दवाइयों का अत्यधिक सेवन: बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक दर्द निवारक दवाएं (Painkillers जैसे NSAIDs) खाना।
- मूत्र मार्ग में रुकावट: बार-बार होने वाला गंभीर यूटीआई (UTI), किडनी में बड़ी पथरी या पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना।
सीकेडी (CKD) की जांच: यूरिन एल्ब्युमिन-क्रिएटिनिन रेशियो (uACR) क्या है?
यूरिन एल्ब्युमिन-क्रिएटिनिन रेशियो (uACR) पेशाब की एक बहुत ही सरल जांच (Urine Test) है। यह टेस्ट यह देखता है कि आपकी किडनियाँ आपके पेशाब में एल्ब्युमिन (Albumin) नाम का एक ज़रूरी प्रोटीन तो लीक नहीं कर रही हैं।
- स्वस्थ किडनियाँ कैसे काम करती हैं? स्वस्थ किडनियाँ शरीर के कचरे और अतिरिक्त पानी को छानकर बाहर निकाल देती हैं, लेकिन एल्ब्युमिन जैसे ज़रूरी प्रोटीनों को खून के अंदर ही सुरक्षित रखती हैं।
- किडनी खराब होने पर क्या होता है? यदि आपकी किडनियाँ डैमेज (क्षतिग्रस्त) हो जाती हैं, तो उनके फिल्टर ढीले पड़ जाते हैं। इस वजह से एल्ब्युमिन प्रोटीन छनकर आपके पेशाब में लीक होने लगता है। पेशाब में एल्ब्युमिन आना किडनी की बीमारी (CKD) का शुरुआती और मुख्य संकेत हो सकता है।
uACR रिपोर्ट के नतीजों को कैसे समझें?
यह टेस्ट मुख्य रूप से यह मापता है कि आपके यूरिन में हर एक ग्राम क्रिएटिनिन पर कितने मिलीग्राम एल्ब्युमिन मौजूद है:
- सामान्य (Normal): 30 mg/g से कम — इसका मतलब है कि आपकी किडनियाँ ठीक काम कर रही हैं।
- बढ़ा हुआ (High): 30 mg/g से 300 mg/g के बीच — इसे माइक्रोएल्ब्युमिनुरिया (Microalbuminuria) कहते हैं। यह किडनी की बीमारी के शुरुआती चरण का इशारा है।
- बहुत अधिक (Very High): 300 mg/g से अधिक — इसे मैक्रोएल्ब्युमिनुरिया (Macroalbuminuria) कहते हैं। यह किडनी को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचने का संकेत है।
सलाह: खासकर डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को साल में कम से कम एक बार यह टेस्ट ज़रूर करवाना चाहिए ताकि किडनी के नुकसान को पहली स्टेज में ही पकड़ा जा सके।
1. CKD में होने वाली मुख्य समस्याएं (Symptoms)
शुरुआती चरणों में CKD के लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:
- हाथ-पैरों और चेहरे पर सूजन: किडनी जब अतिरिक्त पानी नहीं निकाल पाती, तो पैरों, टखनों (Ankles) और आंखों के नीचे सूजन आ जाती है।
- थकान और कमजोरी: खून की कमी (Anemia) होने के कारण मरीज को हर समय थकान महसूस होती है।
- पेशाब में बदलाव: पेशाब का बार-बार आना (विशेषकर रात में), पेशाब में झाग (Foam) बनना या पेशाब की मात्रा कम हो जाना।
- भूख न लगना और मतली: शरीर में यूरिया और अन्य टॉक्सिन्स बढ़ने से उल्टी जैसा मन होना और भूख में कमी आना।
- त्वचा में खुजली और सूखापन: खून में फास्फोरस का स्तर बढ़ने से त्वचा में तेज खुजली हो सकती है।
- हाई ब्लड प्रेशर: किडनी खराब होने से रक्तचाप अनियंत्रित हो जाता है।
2. CKD की स्टेज क्या हैं? (Stages of CKD)
किडनी की कार्यक्षमता को eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate) के आधार पर मापा जाता है। eGFR यह बताता है कि आपकी किडनी प्रति मिनट कितने मिलीलीटर खून साफ कर रही है। इसके आधार पर CKD को 5 स्टेज में बांटा गया है:
| स्टेज (Stage) | eGFR का स्तर (mL/min/1.73 m²) | किडनी की स्थिति (Condition) |
| स्टेज 1 | 90 या उससे अधिक | किडनी में मामूली नुकसान, लेकिन काम सामान्य रूप से कर रही है। |
| स्टेज 2 | 60 से 89 | किडनी की कार्यक्षमता में हल्की गिरावट। |
| स्टेज 3a | 45 से 59 | किडनी की कार्यक्षमता में मध्यम (Moderate) गिरावट। |
| स्टेज 3b | 30 से 44 | कार्यक्षमता में गंभीर मध्यम गिरावट। |
| स्टेज 4 | 15 से 29 | किडनी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त (Severe Damage)। |
| स्टेज 5 | 15 से कम | किडनी फेलियर (Kidney Failure), जिसमें डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है। |
CKD Stages based on eGFR Levels


3. CKD में होने वाले टेस्ट और मुख्य पैरामीटर्स (Tests & Parameters)
किडनी की बीमारी को पकड़ने और उसकी निगरानी के लिए मुख्यतः दो प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं: ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट।
मुख्य पैरामीटर्स जो CKD का इशारा करते हैं:
- सीरम क्रिएटिनिन (Serum Creatinine): क्रिएटिनिन मांसपेशियों के काम करने से निकलने वाला एक अपशिष्ट है। अगर किडनी ठीक से काम नहीं कर रही, तो खून में क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ जाता है।
- eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate): यह सबसे महत्वपूर्ण पैरामीटर है। यदि आपका eGFR लगातार 3 महीने या उससे अधिक समय तक 60 से कम रहता है, तो यह स्पष्ट रूप से CKD का संकेत है।
- यूरिन एल्ब्युमिन (Urine Albumin) या ACR: स्वस्थ किडनी प्रोटीन को पेशाब में नहीं जाने देती। अगर यूरिन टेस्ट में एल्ब्युमिन (प्रोटीन) आ रहा है, तो इसका मतलब है कि किडनी के फिल्टर्स को नुकसान पहुंचा है। Urine Albumin-to-Creatinine Ratio (ACR) का 30 mg/g से अधिक होना किडनी डैमेज दिखाता है।
- ब्लड यूरिया नाइट्रोजन (BUN): खून में यूरिया का बढ़ा हुआ स्तर भी किडनी की कमजोरी को दर्शाता है।
अन्य सहायक टेस्ट:
- किडनी अल्ट्रासाउंड (Ultrasound KUB): इससे किडनी का आकार (Size) पता चलता है। सीकेडी में अक्सर किडनियों का आकार सिकुड़कर छोटा हो जाता है।
- इलेक्ट्रोलाइट्स टेस्ट: खून में पोटैशियम, फास्फोरस और सोडियम के स्तर की जांच की जाती है, जो किडनी की खराबी में असंतुलित हो जाते हैं।
किडनी (वृक्क) को स्वस्थ और फिट रखने के लिए प्राकृतिक आहार (Natural Diet) का मुख्य उद्देश्य शरीर से विषैले तत्वों (Toxins/आम) को बाहर निकालना और किडनी के फिल्टरों पर अतिरिक्त दबाव न डालना है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों के अनुसार, किडनी के लिए ऐसा भोजन सबसे अच्छा होता है जो पचने में हल्का हो, जिसमें पानी की अच्छी मात्रा हो और जो शरीर में एसिड (अम्ल) न बनाए।
किडनी को हमेशा फिट रखने के लिए आपका दैनिक आहार इस प्रकार होना चाहिए:
1. किडनी के लिए अमृत समान सब्जियां
ये सब्जियां क्षारीय (Alkaline) होती हैं, इनमें पानी की मात्रा अधिक होती है, और ये किडनी के फिल्टरों को साफ रखती हैं:
- लौकी, तोरई और कद्दू: ये सब्जियां पचने में बहुत हल्की होती हैं और प्राकृतिक रूप से पेशाब की मात्रा बढ़ाकर शरीर की सूजन को कम करती हैं।
- पेठा (Ash Gourd): सफेद पेठे का ताजा जूस सुबह खाली पेट पीना किडनी की सफाई (Detox) के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। यह पूरे यूरिनरी सिस्टम को ठंडा रखता है।
- मूली: मूली का सेवन या इसका रस किडनी की कार्यक्षमता बढ़ाता है और अगर पथरी (Stone) की शुरुआती समस्या हो, तो उसे गलाकर बाहर निकालने में मदद करता है।
- पत्तागोभी और फूलगोभी: इनमें पोटैशियम की मात्रा कम और विटामिन-सी व फाइबर अधिक होता है, जो किडनी के लिए बहुत सुरक्षित है।
2. किडनी को सुरक्षित रखने वाले फल
एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर फल किडनी की कोशिकाओं (Cells) को खराब होने से बचाते हैं:
- सेब (Apple): सेब में मौजूद फाइबर और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण किडनी को संक्रमण और सूजन से बचाते हैं।
- क्रैनबेरी और जामुन (Berries): क्रैनबेरी का जूस यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) को रोकने में सबसे असरदार है। यह बैक्टीरिया को किडनी और पेशाब की नली में चिपकने नहीं देता।
- अनार: यह किडनी की कार्यप्रणाली में सुधार करता है और पथरी बनने की प्रक्रिया को रोकता है।
3. अनाज, दालें और घी-तेल
- जौ (Barley): किडनी के लिए जौ को सबसे उत्तम अनाज माना गया है। जौ का पानी (जौ को पानी में उबालकर छाना हुआ पानी) पीने से यूरिक एसिड कम होता है और किडनी पूरी तरह डिटॉक्स हो जाती है।
- मूँग की दाल: भारी दालों (जैसे राजमा, छोले, उड़द) की तुलना में मूँग की दाल बहुत हल्की होती है। यह किडनी पर बिना अतिरिक्त यूरिया या क्रिएटिनिन का बोझ डाले शरीर को साफ प्रोटीन देती है।
- गाय का शुद्ध घी: भोजन पकाने या दाल में ऊपर से आधा चम्मच गाय का शुद्ध घी डालने से शरीर के आंतरिक स्रोत (Channels) चिकने रहते हैं और टॉक्सिन्स आसानी से बाहर निकल जाते हैं।
4. डिटॉक्स करने वाले मसाले और पेय पदार्थ
- धनिया और सौंफ का पानी: सूखा धनिया और सौंफ को रात में पानी में भिगो दें, सुबह इस पानी को छानकर पिएं। यह पेशाब की जलन को शांत करता है और किडनी को साफ करता है।
- अदरक और हल्दी: इनमें प्राकृतिक रूप से सूजन कम करने (Anti-inflammatory) के गुण होते हैं, जो किडनी के टिश्यूज की रक्षा करते हैं।
- नींबू पानी: गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर पीने से शरीर को सिट्रेट मिलता है, जो कैल्शियम की पथरी को बनने से रोकता है।
🚫 इन चीजों से तुरंत दूरी बनाएं
यदि आप अपनी किडनी को हमेशा स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो इन चीजों का सेवन बेहद कम या बंद कर दें:
- सफेद नमक की अधिकता: ज्यादा नमक ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, जिससे किडनी के फिल्टर (नेफ्रॉन) सीधे तौर पर डैमेज होते हैं। इसकी जगह सीमित मात्रा में सेंधा नमक का प्रयोग करें।
- पैक्ड और प्रोसेस्ड फूड: चिप्स, नमकीन, डिब्बाबंद सूप और सॉस में भारी मात्रा में सोडियम और प्रिजर्वेटिव होते हैं जो किडनी को बीमार करते हैं।
- जरूरत से ज्यादा प्रोटीन सप्लीमेंट्स: बिना कसरत या बिना डॉक्टर की सलाह के हैवी प्रोटीन पाउडर लेने से खून में क्रिएटिनिन और यूरिया का स्तर तेजी से बढ़ता है, जिससे किडनी फेलियर का खतरा रहता है।
- पेनकिलर्स (दर्द निवारक दवाएं): बिना डॉक्टर के पर्चे के बार-बार कॉम्बीफ्लेम, ब्रूफेन या अन्य दर्द निवारक दवाएं खाना किडनी को सीधे तौर पर नष्ट कर देता है।
यह आहार योजना पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित है। क्या आप यह डाइट सामान्य रूप से स्वस्थ रहने के लिए जानना चाहते हैं, या किसी मरीज के लिए जिनकी किडनी में पथरी (Stone), यूरिक एसिड या क्रिएटिनिन (Creatinine) बढ़ा हुआ है? यदि कोई विशेष लक्षण या बीमारी है, तो मुझे अवश्य बताएं ताकि मैं और सटीक जानकारी दे सकूं।
आयुर्वेद में किडनी के रोगों (जैसे Chronic Kidney Disease या वृक्क रोग) की चिकित्सा के लिए भस्म (Bhasma) और आसव-अरिष्ट या क्वाथ (Ashya/Liquid preparations) का उपयोग वात-कफ दोष को संतुलित करने, यूरिया-क्रिएटिनिन को नियंत्रित करने और मूत्रवह स्रोतों (urinary system) की ब्लॉकेज हटाने के लिए किया जाता है।
किडनी रोगों में प्रयोग होने वाले प्रमुख भस्म और औषधीय योग निम्नलिखित हैं:
1. प्रमुख आयुर्वेदिक दवाएं जो किड्नी रिपेर करती हैं
किडनी की कार्यप्रणाली को सुधारने और एनीमिया (खून की कमी) व सूजन जैसे लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए इन भस्मों/ दवाओं का उपयोग किया जाता है:
- Gymnoveda की प्रमुख दवाएं : gymnoveda की ‘पुनर्नवा गुगगलू, अश्वगंधा, लिवर प्लस, kidney केयर जूस, पंचगव्य जूस creatinine cutter जूस creatinin प्लस कैप्सल प्रमुख ‘रूप में प्रयोग होती है। यह किडनी की सूजन को कम करने, टॉक्सिन्स बाहर निकालने और किडनी की खराबी के कारण होने वाली एनीमिया (खून की कमी) को दूर करने में बेहद असरदार है।
क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) में चन्द्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati) और दशमूल (Dashmool) का संयोजन (Combination) आयुर्वेद में एक बहुत ही प्रभावी और सुरक्षित चिकित्सा विकल्प माना जाता है। CKD की स्थिति में जब किडनी के नेफ्रॉन्स धीरे-धीरे काम करना कम कर देते हैं, तब यह दोनों औषधियां मिलकर किडनी पर दबाव को कम करने और लक्षणों को नियंत्रित करने का काम करती हैं।
इन दोनों के मुख्य फायदे निम्नलिखित हैं:
Kidney care juice aur capsule के फायदे (Benefits of C P Plus in CKD)
C P Plusमुख्य रूप से मूत्रवह स्रोतों (Urinary System) को बल देने वाली और वात-कफ नाशक औषधि है:
- क्रिएटिनिन और यूरिया को नियंत्रित करना: यह शरीर के माइक्रो-सर्कुलेशन को सुधारती है, जिससे किडनी के फिल्टरों (नेफ्रॉन्स) की कार्यक्षमता बढ़ती है और खून में जमा यूरिया व क्रिएटिनिन को प्राकृतिक रूप से छानकर बाहर निकालने में मदद मिलती है।
- एल्ब्युमिनुरिया (पेशाब में प्रोटीन आना) को रोकना: CKD के मरीजों में पेशाब के रास्ते प्रोटीन लीक होने की समस्या आम है। चन्द्रप्रभा वटी अपने कसैले (Astringent) गुणों के कारण प्रोटीन लीकेज को कम करने में सहायक है.
- पेशाब की रुकावट दूर करना: यह एक प्राकृतिक मूत्रल (Diuretic) है। यह यूरिन आउटपुट को बढ़ाती है जिससे शरीर में टॉक्सिन्स जमा नहीं हो पाते।
- यूटीआई (UTI) से बचाव: CKD के मरीजों को बार-बार यूरिन इंफेक्शन होने का खतरा रहता है। यह वटी यूरिनरी ट्रैक्ट के इन्फेक्शन और जलन को ठीक रखती है।
दशमूल के फायदे (Benefits of Dashmool/Dashmoolarishta/Kwath)
दशमूल दस पवित्र जड़ी-बूटियों की जड़ों का मिश्रण है, जो आयुर्वेद में सबसे बेहतरीन वात-शामक और सूजन नाशक (Anti-inflammatory) योग माना जाता है:
- किडनी की सूजन (Edema/स्वेलिंग) को कम करना: CKD में पैरों, चेहरे या पूरे शरीर में पानी जमा होने के कारण सूजन आ जाती है। दशमूल अपने ‘शोथहर’ (Anti-inflammatory) गुण के कारण शरीर से अतिरिक्त फ्लूइड को बाहर निकालकर सूजन को तेजी से कम करता है।
- किडनी के टिश्यूज की रक्षा (Nephroprotective): दशमूल किडनी की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाता है, जिससे किडनी का डैमेज एक स्तर पर रुक जाता है या उसकी गति धीमी हो जाती है।
- खून की कमी (Anemia) और कमजोरी दूर करना: CKD के मरीजों में एरिथ्रोपोइटिन हार्मोन की कमी के कारण हीमोग्लोबिन गिरने लगता है। दशमूल पाचन तंत्र को सुधारकर नया खून बनाने में मदद करता है और शरीर की कमजोरी/थकान को मिटाता है।
- वात दोष का शमन: आयुर्वेद के अनुसार किडनी की सिकुड़न या उसका काम बंद करना ‘वात दोष’ के बढ़ने के कारण होता है। दशमूल वात को शांत कर किडनी के संकुचन (Shrinking) को रोकता है।
दोनों को एक साथ लेने का तरीका
आमतौर पर आयुर्वेदिक चिकित्सक C P Plus को दशमूल क्वाथ या दशमूलारिष्ट के साथ लेने की सलाह देते हैं। यह दोनों मिलकर किडनी के स्वास्थ्य और कार्यप्रणाली को सहयोग करने में मदद करते हैं।
- इसमे कुछ प्रयोग किए जाने वाले भस्म
- गोदन्ती भस्म (Godanti Bhasma): शरीर में कैल्शियम के स्तर को संतुलित करने और कमजोरी को कम करने के लिए इसका प्रयोग सहायक औषधि के रूप में किया जाता है।
- वंग भस्म (Vanga Bhasma): किडनी फेलियर की गंभीर स्थिति में मूत्र प्रणाली को बल देने और यूरिन आउटपुट को नियमित करने के लिए बहुत ही नियंत्रित मात्रा में इसका उपयोग किया जाता है।
- हजरुल यहूद भस्म (Hajrul Yahood Bhasma): यदि किडनी की समस्या पथरी (Kidney Stone) के कारण है, तो यह भस्म पथरी को गलाकर बाहर निकालने में मदद करती है।
2. प्रमुख लिक्विड योग और औषधियां (Asava, Arishta & Kwatha)
आयुर्वेद में किडनी को डिटॉक्स करने के लिए कषाय (क्वाथ) और अर्क का अधिक प्रयोग होता है क्योंकि गंभीर किडनी रोगों में हैवी मेटल युक्त भस्मों की तुलना में हर्बल तरल पदार्थ अधिक सुरक्षित माने जाते हैं:
- पुनर्नवाद्यरिष्ट (Punarnavadyarishta): यह शरीर से एक्स्ट्रा फ्लूइड (पानी जमा होना) को निकालता है, जिससे पैरों और चेहरे की सूजन (Edema) कम होती है。
- (किड्नी केयर Kwatha): वरुण गोकशूर पुनर्नवा जड़ी-बूटी और गौ मूत्र अर्क के साथ की जड़ी बूटी से बना मूत्र मार्ग की रुकावट (Blockage) को दूर करने और बढ़े हुए यूरिक एसिड व क्रिएटिनिन को छानकर बाहर करने में मदद करती है।
तृणपंचमूल क्वाथ (Trinapanchamoola Kwatha): पांच प्राकृतिक जड़ों से बना यह काढ़ा शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखता है और प्राकृतिक रूप से पेशाब की मात्रा बढ़ाता है। तृणपंचमूल क्वाथ (Trinapanchamoola Kwatha) आयुर्वेद का एक अत्यंत प्रभावी और पारंपरिक काढ़ा है, जो पांच विशेष प्रकार की प्राकृतिक घासों/पौधों की जड़ों से मिलकर बनता है [तृण = घास, पंच = पांच, मूल = जड़]।
क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) और मूत्र प्रणाली (Urinary System) के विकारों में किड्नी केयर क्वाथ का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है। आइए इसके घटक, फायदे और उपयोग के तरीके को विस्तार से समझते हैं:
क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) में इसके मुख्य फायदे
किडनी की बीमारियों में जब शरीर से टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकल पाते, तब किड्नी केयर क्वाथ निम्नलिखित तरीकों से काम करता है:
- प्राकृतिक मूत्रल (Natural Diuretic): यह किडनी पर बिना कोई हानिकारक दबाव डाले प्राकृतिक रूप से पेशाब की मात्रा (Urine Output) को बढ़ाता है। इससे शरीर में रुका हुआ पानी और विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं।
- सूजन (Edema) को कम करना: CKD के मरीजों में पैरों, आंखों के नीचे और पेट में पानी जमा होने (Fluid Retention) के कारण जो सूजन आती है, यह काढ़ा उसे कम करने में बेहद मददगार है।
- यूरिक एसिड और क्रिएटिनिन में सहायक: पेशाब के प्रवाह को सुधारकर यह खून में बढ़े हुए यूरिक एसिड, यूरिया और कुछ हद तक क्रिएटिनिन को छानकर बाहर निकालने में किडनी की मदद करता है।
- पेशाब की जलन और इन्फेक्शन (UTI) का नाश: इसकी तासीर ठंडी (शीत वीर्य) होती है। इसलिए यह पेशाब में होने वाली तीव्र जलन, रुक-रुक कर पेशाब आना और बार-बार होने वाले यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन को जड़ से खत्म करता है।
- पथरी (Kidney Stones) को गलाना: यदि किडनी में रुकावट का कारण छोटी पथरी या क्रिस्टल्स हैं, तो यह उन्हें तोड़कर पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देता है।
- Gymnoveda की गोक्षुरादि गुग्गुल / क्वाथ (Gokshuradi): गोक्षुर (गोखरू) में एंटी-इंफ्लेमेटरी और रीजुवेनेटिंग गुण होते हैं जो किडनी के डैमेज सेल्स को रिपेयर करने में सहायता करते हैं
चंदनसाव (Chandanasava) एक पारंपरिक आयुर्वेदिक आसव (किण्वित औषधि) है, जिसका उपयोग मूत्र और गुर्दे से जुड़े विकारों में किया जाता है। क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) में इसके संभावित लाभों को लेकर आधुनिक शोध और आयुर्वेद में कुछ संकेत मिलते हैं, जिन्हें नीचे संक्षेप में दिया गया है:
CKD में संभावित लाभ (संकेत)
- एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण: आधुनिक नेटवर्क फार्माकोलॉजी और विश्लेषण बताते हैं कि चंदनसाव में मौजूद बायोएक्टिव यौगिक सूजन (जैसे TNF और IL6) को कम करने और ऑक्सीडेटिव तनाव से लड़ने में मदद कर सकते हैं, जो CKD के मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।
- मूत्र मार्ग की शुद्धि (Diuretic Effect): यह मूत्रवर्धक के रूप में कार्य करता है, जिससे मूत्र खुलकर आने में मदद मिलती है और शरीर के विषैले तत्व (Toxins) पेशाब के जरिए बाहर निकल सकते हैं।
- दहन और मूत्र विकार में राहत: सीकेडी या यूटीआई (UTI) से जुड़ी पेशाब में जलन या बेचैनी को शांत करने के लिए इसके शीतलन (Cooling) प्रभाव का उपयोग किया जाता है।
महत्वपूर्ण सावधानियां
- अल्कोहल की मात्रा: चंदनसाव एक स्व-उत्पादित किण्वित औषधि है जिसमें मध्यम मात्रा में प्राकृतिक अल्कोहल होता है। इसलिए किडनी फेलियर या गंभीर सीकेडी के मामलों में बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन खतरनाक हो सकता है। [1]
- सेल्फ-मेडिकेशन से बचें: सीकेडी एक गंभीर स्थिति है। किसी भी आयुर्वेदिक दवा को शुरू करने से पहले अपने नेफ्रोलॉजिस्ट (Nephrologist) या योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें, क्योंकि इसमें मौजूद शुगर/गुड़ और अन्य घटक आपकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति या रक्त शर्करा को प्रभावित कर सकते हैं
if_you_would_like_let_me_know:
- क्या मरीज ने हाल ही में कोई ब्लड या यूरिन टेस्ट करवाया है?
- उनका क्रिएटिनिन या eGFR स्तर रिपोर्ट में कितना आया है?
ताकि मैं रिपोर्ट के आधार पर आपको और सटीक जानकारी दे सकूं।
DR S M BHATT
AYURVEDIC CONSULTANT MAYANK CLINIC MEERUT 8556092620
- #ChronicKidneyDisease
- #CKD
- #KidneyDisease
- #KidneyHealth
- #CKDAwareness
- #KidneyDiseaseAwareness
- #KidneyFailure
- #eGFR
- #CKDTest
- #KidneyFunction
- #LabResults
- #Creatinine
- #KidneyTest
- #GlowFiltrationRate
- #CKDSymptoms
- #KidneyDiseaseSymptoms
- #FoamyUrine
- #KidneyPain
- #Fatigue
- #SwollenAnkles
- #WaterRetention
- #KidneyWarrior
- #RenalHealth
- #KidneyCare
- #PreventCKD
- #KidneyDiet