Diabetes and CKD uACR

CKD ME uACR SE PATA LAGAYEN KIDNEY KITNI % KAAM KAR RAHI

“*क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) एक ऐसी स्थिति है जिसमें गुर्दे (Kidneys) धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं। इस वजह से शरीर में अपशिष्ट पदार्थ (Toxins) जमा होने लगते हैं और कई प्रकार की शारीरिक समस्याएं सामने आती हैं।*

GFR (किडनी कितने प्रतिशत काम कर रही है) किडनी कितने प्रतिशत काम कर रही है, यह जानने के लिए eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate) टेस्ट देखा जाता है। uACR टेस्ट का काम यह बताना है कि किडनी में कितना नुकसान या डैमेज हुआ है और यूरिन (पेशाब) के रास्ते कितना प्रोटीन (एल्ब्युमिन) बाहर निकल रहा है।

क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) की पूरी स्थिति समझने के लिए दोनों टेस्ट नीचे दिए गए तरीके से काम करते हैं

यह टेस्ट आपके खून में क्रिएटिनिन (Creatinine) के स्तर, उम्र और लिंग के आधार पर निकाला जाता है। इसे आप सीधे तौर पर किडनी का वर्किंग प्रतिशत मान सकते हैं:

uACR (किडनी में कितना डैमेज/लीकेज है)

यह एक यूरिन टेस्ट है जो बताता है कि किडनी के फिल्टर कितने खराब हुए हैं:

भारत में कितने प्रतिशत लोगों की किडनी प्रभावित है?

2. किस उम्र में सबसे ज्यादा हो रही है किडनी फेल?

विकसित देशों (जैसे अमेरिका या यूरोप) की तुलना में भारत में लोग 15 साल पहले किडनी फेलियर का शिकार हो रहे हैं।

भारत में कम उम्र में किडनी फेल होने के मुख्य कारण:

  1. डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का अनियंत्रित होना: भारत को दुनिया की डायबिटीज राजधानी कहा जाता है। यह दोनों बीमारियाँ समय से पहले किडनियों को पूरी तरह नष्ट कर देती हैं।
  2. जागरूकता की कमी: शुरुआती स्टेज (स्टेज 1 से 3) में कोई दर्द या बड़ा लक्षण न होने के कारण लोग जांच नहीं करवाते। जब तक मरीज डॉक्टर के पास पहुँचता है, तब तक किडनी 80-90% फेल हो चुकी होती है।

क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) होने का मुख्य कारण क्या है?

ज़्यादातर मामलों में, किडनी खराब होने या डैमेज होने की मुख्य वजह डायबिटीज (मधुमेह) और हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) होती है।


इसके अलावा किडनी खराब होने के अन्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे:

सीकेडी (CKD) की जांच: यूरिन एल्ब्युमिन-क्रिएटिनिन रेशियो (uACR) क्या है?

यूरिन एल्ब्युमिन-क्रिएटिनिन रेशियो (uACR) पेशाब की एक बहुत ही सरल जांच (Urine Test) है। यह टेस्ट यह देखता है कि आपकी किडनियाँ आपके पेशाब में एल्ब्युमिन (Albumin) नाम का एक ज़रूरी प्रोटीन तो लीक नहीं कर रही हैं।


uACR रिपोर्ट के नतीजों को कैसे समझें?

यह टेस्ट मुख्य रूप से यह मापता है कि आपके यूरिन में हर एक ग्राम क्रिएटिनिन पर कितने मिलीग्राम एल्ब्युमिन मौजूद है:

सलाह: खासकर डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को साल में कम से कम एक बार यह टेस्ट ज़रूर करवाना चाहिए ताकि किडनी के नुकसान को पहली स्टेज में ही पकड़ा जा सके।


1. CKD में होने वाली मुख्य समस्याएं (Symptoms)

शुरुआती चरणों में CKD के लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:


2. CKD की स्टेज क्या हैं? (Stages of CKD)

किडनी की कार्यक्षमता को eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate) के आधार पर मापा जाता है। eGFR यह बताता है कि आपकी किडनी प्रति मिनट कितने मिलीलीटर खून साफ कर रही है। इसके आधार पर CKD को 5 स्टेज में बांटा गया है:

स्टेज (Stage)eGFR का स्तर (mL/min/1.73 m²)किडनी की स्थिति (Condition)
स्टेज 190 या उससे अधिककिडनी में मामूली नुकसान, लेकिन काम सामान्य रूप से कर रही है।
स्टेज 260 से 89किडनी की कार्यक्षमता में हल्की गिरावट।
स्टेज 3a45 से 59किडनी की कार्यक्षमता में मध्यम (Moderate) गिरावट।
स्टेज 3b30 से 44कार्यक्षमता में गंभीर मध्यम गिरावट।
स्टेज 415 से 29किडनी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त (Severe Damage)।
स्टेज 515 से कमकिडनी फेलियर (Kidney Failure), जिसमें डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है।

CKD Stages based on eGFR Levels

3. CKD में होने वाले टेस्ट और मुख्य पैरामीटर्स (Tests & Parameters)

किडनी की बीमारी को पकड़ने और उसकी निगरानी के लिए मुख्यतः दो प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं: ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट।

मुख्य पैरामीटर्स जो CKD का इशारा करते हैं:

  1. सीरम क्रिएटिनिन (Serum Creatinine): क्रिएटिनिन मांसपेशियों के काम करने से निकलने वाला एक अपशिष्ट है। अगर किडनी ठीक से काम नहीं कर रही, तो खून में क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ जाता है।
  2. eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate): यह सबसे महत्वपूर्ण पैरामीटर है। यदि आपका eGFR लगातार 3 महीने या उससे अधिक समय तक 60 से कम रहता है, तो यह स्पष्ट रूप से CKD का संकेत है।
  3. यूरिन एल्ब्युमिन (Urine Albumin) या ACR: स्वस्थ किडनी प्रोटीन को पेशाब में नहीं जाने देती। अगर यूरिन टेस्ट में एल्ब्युमिन (प्रोटीन) आ रहा है, तो इसका मतलब है कि किडनी के फिल्टर्स को नुकसान पहुंचा है। Urine Albumin-to-Creatinine Ratio (ACR) का 30 mg/g से अधिक होना किडनी डैमेज दिखाता है।
  4. ब्लड यूरिया नाइट्रोजन (BUN): खून में यूरिया का बढ़ा हुआ स्तर भी किडनी की कमजोरी को दर्शाता है।

अन्य सहायक टेस्ट:

किडनी (वृक्क) को स्वस्थ और फिट रखने के लिए प्राकृतिक आहार (Natural Diet) का मुख्य उद्देश्य शरीर से विषैले तत्वों (Toxins/आम) को बाहर निकालना और किडनी के फिल्टरों पर अतिरिक्त दबाव न डालना है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों के अनुसार, किडनी के लिए ऐसा भोजन सबसे अच्छा होता है जो पचने में हल्का हो, जिसमें पानी की अच्छी मात्रा हो और जो शरीर में एसिड (अम्ल) न बनाए।

किडनी को हमेशा फिट रखने के लिए आपका दैनिक आहार इस प्रकार होना चाहिए:

1. किडनी के लिए अमृत समान सब्जियां

ये सब्जियां क्षारीय (Alkaline) होती हैं, इनमें पानी की मात्रा अधिक होती है, और ये किडनी के फिल्टरों को साफ रखती हैं:

2. किडनी को सुरक्षित रखने वाले फल

एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर फल किडनी की कोशिकाओं (Cells) को खराब होने से बचाते हैं:

3. अनाज, दालें और घी-तेल

4. डिटॉक्स करने वाले मसाले और पेय पदार्थ


🚫 इन चीजों से तुरंत दूरी बनाएं

यदि आप अपनी किडनी को हमेशा स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो इन चीजों का सेवन बेहद कम या बंद कर दें:

यह आहार योजना पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित है। क्या आप यह डाइट सामान्य रूप से स्वस्थ रहने के लिए जानना चाहते हैं, या किसी मरीज के लिए जिनकी किडनी में पथरी (Stone), यूरिक एसिड या क्रिएटिनिन (Creatinine) बढ़ा हुआ है? यदि कोई विशेष लक्षण या बीमारी है, तो मुझे अवश्य बताएं ताकि मैं और सटीक जानकारी दे सकूं।

आयुर्वेद में किडनी के रोगों (जैसे Chronic Kidney Disease या वृक्क रोग) की चिकित्सा के लिए भस्म (Bhasma) और आसव-अरिष्ट या क्वाथ (Ashya/Liquid preparations) का उपयोग वात-कफ दोष को संतुलित करने, यूरिया-क्रिएटिनिन को नियंत्रित करने और मूत्रवह स्रोतों (urinary system) की ब्लॉकेज हटाने के लिए किया जाता है।

किडनी रोगों में प्रयोग होने वाले प्रमुख भस्म और औषधीय योग निम्नलिखित हैं:

1. प्रमुख आयुर्वेदिक दवाएं जो किड्नी रिपेर करती हैं

किडनी की कार्यप्रणाली को सुधारने और एनीमिया (खून की कमी) व सूजन जैसे लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए इन भस्मों/ दवाओं  का उपयोग किया जाता है:

क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) में चन्द्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati) और दशमूल (Dashmool) का संयोजन (Combination) आयुर्वेद में एक बहुत ही प्रभावी और सुरक्षित चिकित्सा विकल्प माना जाता है। CKD की स्थिति में जब किडनी के नेफ्रॉन्स धीरे-धीरे काम करना कम कर देते हैं, तब यह दोनों औषधियां मिलकर किडनी पर दबाव को कम करने और लक्षणों को नियंत्रित करने का काम करती हैं।

इन दोनों के मुख्य फायदे निम्नलिखित हैं:

Kidney care juice aur capsule के फायदे (Benefits of C P Plus in CKD)

C P Plusमुख्य रूप से मूत्रवह स्रोतों (Urinary System) को बल देने वाली और वात-कफ नाशक औषधि है:

दशमूल के फायदे (Benefits of Dashmool/Dashmoolarishta/Kwath)

दशमूल दस पवित्र जड़ी-बूटियों की जड़ों का मिश्रण है, जो आयुर्वेद में सबसे बेहतरीन वात-शामक और सूजन नाशक (Anti-inflammatory) योग माना जाता है:


दोनों को एक साथ लेने का तरीका

आमतौर पर आयुर्वेदिक चिकित्सक C P Plus  को दशमूल क्वाथ या दशमूलारिष्ट के साथ लेने की सलाह देते हैं। यह दोनों मिलकर किडनी के स्वास्थ्य और कार्यप्रणाली को सहयोग करने में मदद करते हैं।

2. प्रमुख लिक्विड योग और औषधियां (Asava, Arishta & Kwatha)

आयुर्वेद में किडनी को डिटॉक्स करने के लिए कषाय (क्वाथ) और अर्क का अधिक प्रयोग होता है क्योंकि गंभीर किडनी रोगों में हैवी मेटल युक्त भस्मों की तुलना में हर्बल तरल पदार्थ अधिक सुरक्षित माने जाते हैं:

तृणपंचमूल क्वाथ (Trinapanchamoola Kwatha): पांच प्राकृतिक जड़ों से बना यह काढ़ा शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखता है और प्राकृतिक रूप से पेशाब की मात्रा बढ़ाता है। तृणपंचमूल क्वाथ (Trinapanchamoola Kwatha) आयुर्वेद का एक अत्यंत प्रभावी और पारंपरिक काढ़ा है, जो पांच विशेष प्रकार की प्राकृतिक घासों/पौधों की जड़ों से मिलकर बनता है [तृण = घास, पंच = पांच, मूल = जड़]।

क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) और मूत्र प्रणाली (Urinary System) के विकारों में किड्नी केयर  क्वाथ का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है। आइए इसके घटक, फायदे और उपयोग के तरीके को विस्तार से समझते हैं:

  क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) में इसके मुख्य फायदे

किडनी की बीमारियों में जब शरीर से टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकल पाते, तब किड्नी केयर  क्वाथ निम्नलिखित तरीकों से काम करता है:

चंदनसाव (Chandanasava) एक पारंपरिक आयुर्वेदिक आसव (किण्वित औषधि) है, जिसका उपयोग मूत्र और गुर्दे से जुड़े विकारों में किया जाता है। क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) में इसके संभावित लाभों को लेकर आधुनिक शोध और आयुर्वेद में कुछ संकेत मिलते हैं, जिन्हें नीचे संक्षेप में दिया गया है:

CKD में संभावित लाभ (संकेत)

महत्वपूर्ण सावधानियां

if_you_would_like_let_me_know:

ताकि मैं रिपोर्ट के आधार पर आपको और सटीक जानकारी दे सकूं।

DR S M BHATT

AYURVEDIC CONSULTANT MAYANK CLINIC MEERUT 8556092620

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