आयुर्वेद में हर्निया को ‘आंत्रवृद्धि’ (Antravriddhi) कहा जाता है, जो मुख्य रूप से शरीर में वात दोष के बिगड़ने और मांसपेशियों की कमजोरी के कारण होता है. हर्निया होने पर पेट का कोई अंदरूनी हिस्सा या आंत, कमजोर मांसपेशियों की दीवार को फाड़कर बाहर उभर आती है. [1, 2]
नीचे हर्निया होने के मुख्य कारण और इसके प्रबंधन के लिए आयुर्वेदिक उपाय दिए गए हैं। [1, 2]

🛑 हर्निया होने के मुख्य कारण (Causes of Hernia)
मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव और उनकी कमजोरी के कारण हर्निया होता है. इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं: [1]
- क्रोनिक कब्ज: शौच के समय लगातार बहुत अधिक जोर लगाना.
- भारी वजन उठाना: अचानक या बार-बार भारी सामान उठाना.
- पुरानी खांसी: लंबे समय से लगातार तेज खांसी होना.
- मोटापा: पेट की मांसपेशियों पर अत्यधिक दबाव पड़ना.
- कमजोर मांसपेशियां: बढ़ती उम्र या जन्मजात कमजोरी के कारण पेट की दीवार का कमजोर होना.
- गर्भावस्था: पेट के निचले हिस्से पर अतिरिक्त दबाव बनना.
🌿 हर्निया के लिए आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Remedies)
ध्यान दें: गंभीर, बड़े या फंसे हुए हर्निया (Strangulated Hernia) के लिए अंततः सर्जरी ही एकमात्र परमानेंट इलाज है। शुरुआती लक्षणों में राहत और मांसपेशियों को सहारा देने के लिए आयुर्वेद बहुत मददगार है