for Cancer arthritis and Diabets control

क्या आपके बाल समय से पूर्व झड़ रहे?

 क्या समय से पहले हार्ट अटैक या रहे?

 क्या आपकी किड्नी कम उम्र मे ही खराब हो गई ?

क्या आपको हमेशा सिर दर्द होता है ?

हड्डियाँ कमजोर हैं ?

चलने मे दिक्कत है ?

डॉ शीलेन्द्र मंगल भट्ट

पीएचडी बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय  वाराणसी  , आयुर्वेदिक कन्सल्टन्ट मयंक क्लिनिक मेरठ,  8556092620

हम आज इसलिए बीमार पड़ रहे हैं क्योंकि हम प्रकृति की दी हुई मुफ्त और अनमोल चीज़ों—जैसे शुद्ध हवा, शुद्ध पानी और सूरज की रोशनी—की कद्र नहीं कर रहे हैं। आधुनिक जीवनशैली में हम इन प्राकृतिक उपहारों से दूर होते जा रहे हैं, जिसके कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो रही हैं।

प्रकृति की इन मुफ्त चीज़ों का हमारे स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है:

पंचमहाभूत (आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी) के संतुलन से मानव शरीर का स्वास्थ्य संचालित होता है और प्राकृतिक चिकित्सा में इन तत्वों के प्रयोग से पाचन विकार, जोड़ों का दर्द, तनाव और त्वचा रोग ठीक होते हैं। [1, 2, 3]

पंचमहाभूत के सिद्धांत

आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार संपूर्ण ब्रह्मांड और मानव शरीर पांच मूलभूत तत्वों से बने हैं: [1, 2]

शरीर में इन तत्वों का असंतुलन ही रोग का मुख्य कारण बनता है। [1]

प्राकृतिक चिकित्सा से ठीक होने वाले प्रमुख रोग

प्राकृतिक चिकित्सा इन पांच तत्वों (जैसे मिट्टी, धूप, पानी, और उपवास) का उपयोग करके शरीर की आंतरिक सफाई करती है:

जब हम प्रकृति के इन मूल नियमों की अनदेखी करते हैं, तो हमारे शरीर के भीतर कई जटिल बीमारियां पनपने लगती हैं। विज्ञान भी अब इस बात की पुष्टि करता है कि आधुनिक जीवन में इन तीन चीजों की कमी सीधे तौर पर गंभीर बीमारियों को बुलावा देती है।

आइए इन तीनों विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हैं कि इनकी कमी से शरीर पर क्या प्रभाव पड़ते हैं और कौन से रोग होते हैं:


1. धूप की कमी (Lack of Sunlight) और विटामिन डी का संकट

सूरज की रोशनी केवल उजाला नहीं देती, बल्कि यह हमारे शरीर के लिए एक आवश्यक हार्मोन (विटामिन डी) बनाने का एकमात्र प्राकृतिक स्रोत है. [1]


2. नंगे पैर न चलने (Lack of Grounding) से होने वाले रोग

आज हम 24 घंटे रबर या प्लास्टिक के जूते-चप्पल पहने रहते हैं या कंक्रीट के फर्श पर रहते हैं। विज्ञान में मिट्टी या घास पर नंगे पैर चलने को ‘अर्थिंग‘ (Earthing) या ‘ग्राउंडिंग‘ (Grounding) कहा जाता है. पृथ्वी में एक प्राकृतिक ऋणात्मक (Negative) विद्युत चार्ज होता है। [1, 2]


3. शुद्ध और प्राकृतिक रोशनी न लेने से आँखों के रोग

दिनभर बंद कमरों में कृत्रिम (एलईडी/फ्लोरोसेंट) लाइट में रहना और कंप्यूटर-मोबाइल की स्क्रीन को देखना आँखों को गंभीर रूप से बीमार कर रहा है।

पंचकर्म चिकित्सा तरंग चिकित्सा से हम होने वाले रोगों पर कंट्रोल कर सकते हैं जसी कैंसर मे डाइअबीटीज़ मे कमर दर्द मे हार्ट अट्टकक मे गए का दूध घी मूत्र चिकित्सा बहुत प्रभावी है

ये चिकित्सा पद्धतियां भारत के पारंपरिक और प्राकृतिक स्वास्थ्य विज्ञान का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आज जब आधुनिक चिकित्सा (Modern Medicine) केवल लक्षणों को दबाने का काम करती है, तब पंचकर्म, तरंग (Vाइब्रेशनल/साउंड) चिकित्सा और पंचगव्य (गाय का दूध, घी, गोमूत्र) जैसी पद्धतियां शरीर को जड़ से साफ करने और उसकी अपनी हीलिंग पावर (आत्म-उपचार क्षमता) को जगाने का काम करती हैं।

आइए समझते हैं कि ये पद्धतियां कैंसर, डायबिटीज, कमर दर्द और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों पर कैसे और क्यों प्रभावी हैं:


1. पंचकर्म चिकित्सा (Panchakarma Therapy)


2. तरंग चिकित्सा (Wave / Vibrational Therapy)

ब्रह्मांड में हर चीज—यहां तक कि हमारे शरीर की कोशिकाएं (Cells) भी—एक निश्चित फ्रीक्वेंसी (आवृत्ति) पर कंपन (Vibrate) करती हैं। जब कोई अंग बीमार होता है, तो उसकी प्राकृतिक फ्रीक्वेंसी बिगड़ जाती है। तरंग चिकित्सा (जैसे ध्वनि तरंगें, मंत्रोच्चारण, या विशिष्ट इलेक्ट्रोमैग्नेटिक थेरेपी) इसी सिद्धांत पर काम करती है।


भारतीय मूल की देसी गाय (A2 श्रेणी) से मिलने वाले तत्व औषधीय गुणों की खान हैं।

तत्वमुख्य गुणगंभीर बीमारियों में लाभ
देसी गाय का दूध (A2 Milk)इसमें प्रोline नाम का अमीनो एसिड होता है, जो आसानी से पचता है और शरीर की कोशिकाओं का पुनर्निर्माण करता है।हार्ट हेल्थ और कमजोरी: यह शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाता है और दिल की मांसपेशियों को मजबूती देता है। कैंसर मरीजों में कीमोथेरेपी के बाद आई कमजोरी को दूर करता है।
देसी गाय का घी (A2 Ghee) avialable hai https://www.gymnoveda.com/product/यह ‘ओज’ बढ़ाता है और इसमें प्रचुर मात्रा में ब्यूटिरिक एसिड (Butyric Acid) होता है, जो आंतों की सेहत के लिए अमृत है।कमर और जोड़ों का दर्द: यह जोड़ों के बीच के प्राकृतिक लुब्रिकेंट (ग्रीस) को बनाए रखता है। आयुर्वेद में घी को ‘योगवाही’ माना गया है, यानी इसके साथ दी गई दवाएं सीधे हड्डियों और नसों के गहरे हिस्सों तक पहुंचती हैं।
गोमूत्र (Cow Urine)
available hai
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यह प्रकृति का सबसे शक्तिशाली डिटॉक्सिफायर (विषाक्तता नाशक) है। इसमें यूरिया, खनिज, और एंटी-ऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में होते हैं।कैंसर और डायबिटीज: गोमूत्र में एंटी-कैंसर और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। यह शरीर के pH लेवल को एल्कलाइन (क्षारीय) बनाता है, जिसमें कैंसर सेल्स जीवित नहीं रह सकते। यह पैंक्रियाज को एक्टिवेट कर शुगर कंट्रोल करने में भी मदद करता है।

A2 देसी गाय का घी पाचन संबंधी समस्याएं, जोड़ों का दर्द, कम इम्यूनिटी, और त्वचा का सूखापन जैसी कई समस्याओं में फायदेमंद होता है। [1, 2, 3]

किन रोगों और समस्याओं में फायदा होता है?

कैसे लेना चाहिए?

हाथों की हस्त मुद्राएं और योगासन शरीर में पंचमहाभूतों (पांच तत्वों) को तुरंत संतुलित करने का सबसे शक्तिशाली माध्यम हैं। हमारी पांचों उंगलियां एक-एक तत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं:

नीचे प्रत्येक तत्व को संतुलित करने वाली मुख्य मुद्रा और आसन दिए गए हैं:

1. अग्नि तत्व (Fire Element) — ऊर्जा और पाचन के लिए

जब शरीर में सुस्ती हो, मोटापा बढ़ रहा हो या पाचन कमजोर हो, तो अग्नि तत्व को संतुलित किया जाता है।

2. वायु तत्व (Air Element) — गैस, दर्द और बेचैनी के लिए

शरीर में वायु बढ़ने से जोड़ों में दर्द, गैस, एसिडिटी और मन में व्याकुलता आती है।

3. आकाश तत्व (Space Element) — मानसिक स्पष्टता और कान के रोगों के लिए

यह तत्व हमारे विचारों की स्पष्टता और शरीर के खोखले अंगों (जैसे कान, गला) से जुड़ा है।

4. पृथ्वी तत्व (Earth Element) — कमजोरी और वजन संतुलित करने के लिए

शारीरिक कमजोरी, थकान और हड्डियों/मांसपेशियों को मजबूती देने के लिए इस तत्व का संतुलन जरूरी है।

5. जल तत्व (Water Element) — त्वचा और तरलता के लिए

शरीर में डिहाइड्रेशन, रूखी त्वचा या रक्त से संबंधित विकारों को ठीक करने के लिए जल तत्व का संतुलन आवश्यक है।


अभ्यास का सही तरीका

महत्वपूर्ण चेतावनी (Disclaimer):
ये सभी पद्धतियां बहुत ही प्रभावी और विज्ञान-सम्मत हैं, लेकिन इनका लाभ तभी मिलता है जब इन्हें शुद्ध रूप में और किसी योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की देखरेख में लिया जाए। उदाहरण के लिए, बाजार में मिलने वाला डिब्बाबंद घी या जर्सी गाय का दूध फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान कर सकता है। गोमूत्र का सेवन भी हमेशा फिल्टर और अर्क (Distilled) रूप में ही करना सुरक्षित होता है।