ऐक्टिव इंसुलिन प्लस gymnoveda की इन्सुलिन कम करने मे प्रभावी
डॉ शीलेन्द्र भट्ट
आयुर्वेदीक consultant मयंक क्लिनिक मेरठ अपपोइन्टमेंट 8556092620
ऐक्टिव इंसुलिन प्लस केवल एक पारंपरिक मिश्रण नहीं है, बल्कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और फार्माकोलॉजिकल शोधों (Pharmacological Research) में भी इसे एक शक्तिशाली औषधि माना गया है। आधुनिक विज्ञान के अनुसार, जब हल्दी (निशा) और आंवला (आमलकी) को मिलाया जाता है, तो यह एक सिनर्जिस्टिक इफेक्ट (Synergistic Effect) पैदा करता है, यानी दोनों जड़ी-बूटियाँ मिलकर एक-दूसरे के असर को कई गुना बढ़ा देती हैं।

मुख्य लाभ और उपयोग
- मधुमेह (डायबिटीज) नियंत्रण: यह रक्त में शर्करा (blood sugar) के स्तर को संतुलित रखने और इंसुलिन की कार्यक्षमता को सुधारने में बेहद मददगार है।
- एंटीऑक्सीडेंट गुण: यह शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (oxidative stress) को कम करती है।
- त्वचा के रोग: यह त्वचा से जुड़े विकारों और संक्रमणों से बचाव करती है।
- इम्यूनिटी बूस्टर: यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है।
वैज्ञानिक शोधों और क्लीनिकल ट्रायल्स के आधार पर ऐक्टिव इंसुलिन प्लस की विस्तृत जानकारी निम्नलिखित है:
1. सक्रिय वैज्ञानिक घटक (Active Chemical Compounds)
ऐक्टिव इंसुलिन प्लस में मौजूद औषधीय गुणों के पीछे इसमें पाए जाने वाले मुख्य फाइटोकेमिकल्स (Phytochemicals) हैं:
- करक्यूमिन (Curcumin): हल्दी में पाया जाने वाला मुख्य तत्व, जो एक शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाला) और एंटीऑक्सीडेंट है।
- विटामिन सी और गैलिक एसिड (Gallic Acid): आंवला में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो फ्री रेडिकल्स से कोशिकाओं की रक्षा करते हैं।
- एलाजिक एसिड (Ellagic Acid) और कोरीलागिन (Corilagin): शोधों में पाया गया है कि ये यौगिक शरीर के ऊतकों को नया जीवन देने (Rejuvenation या रसायन गुण) में मदद करते हैं।
2. मधुमेह (Type-2 Diabetes) पर वैज्ञानिक क्रियाविधि
विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों (जैसे NCBI और ResearchGate पर प्रकाशित शोध) के अनुसार, यह फॉर्मूलेशन निम्नलिखित तरीकों से काम करता है: [1, 2]
- इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार (Insulin Sensitivity): यह शरीर की कोशिकाओं (विशेषकर मांसपेशियों) की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ाता है, जिससे कोशिकाएं रक्त से ग्लूकोज को आसानी से सोख पाती हैं।
- एंजाइम अवरोधक (Enzyme Inhibition): वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि ऐक्टिव इंसुलिन प्लस शरीर में \(\alpha \)-Amylase और \(\alpha \)-Glucosidase नामक एंजाइमों को रोकती है। ये एंजाइम कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में तोड़ते हैं। इन्हें रोकने से भोजन के बाद अचानक शुगर लेवल (Postprandial Glucose) नहीं बढ़ता। [1, 2, 3]
- HbA1c और फास्टिंग शुगर में कमी: चूहों और मनुष्यों पर किए गए क्लीनिकल ट्रायल्स में देखा गया है कि इसके नियमित सेवन से खाली पेट की शुगर (Fasting) और 3 महीने की औसत शुगर (HbA1c) के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट आती है।
3. मधुमेह की जटिलताओं (Complications) से बचाव
आधुनिक विज्ञान में यह साबित हो चुका है कि लंबे समय तक शुगर बढ़ी रहने से शरीर के अंगों को नुकसान पहुँचता है। ऐक्टिव इंसुलिन प्लस इससे सुरक्षा प्रदान करती है:
नेफ्रोपैथी (Kidney Protection): यह किडनी की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाती है।
- रेटिनोपैथी (Eye Protection): आंखों की नसों और रेटिना को सुरक्षित रखती है।
- एथेरोस्क्लेरोसिस (Heart Protection): शोधों के अनुसार, यह खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) और ट्राइग्लिसराइड्स को कम करके धमनियों में प्लाक जमने से रोकती है, जिससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम होता है।
4. प्रीडायबिटीज (Prediabetes) में प्रभावशीलता
हाल ही में प्रीडायबिटिक मरीजों पर किए गए एक रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल (Randomized Controlled Trial) में पाया गया कि ऐक्टिव इंसुलिन प्लस कैप्सूल का सेवन करने वाले मरीजों में बीमारी प्रीडायबिटीज से पूर्ण मधुमेह (Full Diabetes) में नहीं बदली. इसने उनके बॉडी मास इंडेक्स (BMI), फास्टिंग ब्लड शुगर और सूजन के मार्कर (C-Reactive Protein) में सुधार किया.
वैज्ञानिक निष्कर्ष और सेवन का तरीका
- खुराक: वैज्ञानिक अध्ययनों में आमतौर पर 1 से 3 ग्राम चूर्ण या 1-2 टैबलेट/कैप्सूल दिन में दो बार (गुनगुने पानी या शहद के साथ) प्रभावी पाए गए हैं.
- सुरक्षा: शोधों के अनुसार इसके कोई गंभीर दुष्प्रभाव (Side Effects) नहीं देखे गए हैं. हालांकि, यदि आप पहले से ही शुगर की एलोपैथिक दवाएं (जैसे मेटफॉर्मिन) ले रहे हैं, तो इसका सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करें, अन्यथा ब्लड शुगर बहुत कम (Hypoglycemia) हो सकती है
