BISCUIT AND TEA HEALTH ASPECTS

बिस्कुट और स्वास्थ्य विचार

क्या आप बच्चों को ‘जहर’ खिला रहे हैं?

Dr S M BHATT (PhD BHU) Director GYMNOVEDA AYURVEDIC CONSULTANT MEERUT, HELPLINE 8556092620

FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) ने Priyagold बिस्कुट बनाने वाली कंपनी (Surya Food & Agro Ltd) के खिलाफ सबसे बड़ी और हालिया कार्रवाई की है। खाद्य सुरक्षा नियमों के गंभीर उल्लंघन के कारण FSSAI ने इस कंपनी का लाइसेंस सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है और कानूनी कार्रवाई (Prosecution) शुरू कर दी है। [1, 2, 3]

इसके अलावा, हाल ही में Cremica Digestive बिस्कुट पर भी जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में अत्यधिक सल्फाइट (Sulphite) होने के कारण प्रतिबंध लगाया गया था। [4]

________________________________________

बिस्कुट पर बैन लगाने का मुख्य कारण क्या है?

FSSAI की जांच में निम्नलिखित चौंकाने वाली कमियां पाई गईं:

• पशुओं के चारे का इस्तेमाल: Priyagold बिस्कुट में फाइबर (Fibre) के स्रोत के रूप में पशुओं के खाने वाला चोकर (Cattle Feed Bran) मिलाया जा रहा था। जांच में मिले बोरे पर साफ लिखा था कि यह इंसानों के खाने के लिए नहीं बल्कि मवेशियों के चारे के लिए है। [1, 3, 5, 6]

• भारी गंदगी और लापरवाही: फैक्ट्री के निरीक्षण में प्लांट हाइजीन (सफाई), पेस्ट कंट्रोल (कीड़े-मकोड़ों पर नियंत्रण) और कच्चे माल को सही तरीके से न रखने जैसी गंभीर कमियां पाई गईं। [3, 7]

• केमिकल की अधिक मात्रा: Cremica बिस्कुट के मामले में लैब टेस्ट के दौरान निर्धारित सीमा से कहीं अधिक सल्फाइट (Sulphite) कंटेंट पाया गया, जो सेहत के लिए असुरक्षित है। [4]

________________________________________

बच्चों की सेहत पर ऐसे बिस्कुट का क्या प्रभाव पड़ता है?

मवेशियों का चारा, केमिकल और अस्वच्छ वातावरण में बने बिस्कुट बच्चों के नाजुक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर डालते हैं:

1. पेट और पाचन तंत्र की बीमारियां: पशुओं के चारे वाले चोकर में हानिकारक बैक्टीरिया और फंगस (Fungus) हो सकते हैं। इसे खाने से बच्चों में गंभीर फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द, उल्टी, दस्त और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

2. एलर्जी और सांस की तकलीफ: बिस्कुट में सल्फाइट जैसे केमिकल की मात्रा अधिक होने से संवेदनशील बच्चों में गंभीर एलर्जी, अस्थमा (सांस फूलना) और त्वचा पर रैशेज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। [4]

3. मानसिक और शारीरिक विकास पर असर: अस्वच्छ तरीके से बने और केमिकल युक्त खाद्य पदार्थ खाने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर होती है, जिससे वे बार-बार बीमार पड़ते हैं।

4. पोषक तत्वों की कमी: आमतौर पर बाजार में मिलने वाले रिफाइंड मैदा और अत्यधिक चीनी (Sugar) वाले बिस्कुट खाने से बच्चों की भूख मर जाती है, जिससे उनके शरीर को सही पोषण नहीं मिल पाता और शारीरिक विकास रुक जाता है। [8, 9]

आयुर्वेद के अनुसार, चाय और बिस्कुट का संयोजन (Combination) एक ‘विरुद्ध आहार’ (Incompatible Food) और अस्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा माना जाता है, जो शरीर में कई गंभीर रोगों को जन्म दे सकता है। आयुर्वेद के दृष्टिकोण से रोज़ चाय-बिस्कुट खाने से निम्नलिखित समस्याओं और रोगों की संभावना बढ़ जाती है: [1, 2]

1. मंदाग्नि और पाचन विकार (Digestive Disorders)

आयुर्वेद में सभी बीमारियों की जड़ मंदाग्नि (कमजोर पाचन अग्नि) को माना गया है। [3]

• अम्लपित्त (Acidity & Heartburn): चाय में कैफीन और टैनिन होते हैं जो पेट में एसिड बढ़ाते हैं। जब इसके साथ मैदे और चीनी से बने बिस्किट का सेवन किया जाता है, तो यह पेट की परत को उत्तेजित कर गंभीर एसिडिटी, खट्टी डकारें और सीने में जलन पैदा करता है। [4, 5, 6]

• विबंध (Constipation & Bloating): बिस्किट पूरी तरह से मैदे (रिफाइंड आटा) से बनते हैं जिसमें फाइबर बिल्कुल नहीं होता। यह आंतों में जाकर चिपक जाता है, जिससे मल कड़ा हो जाता है और कब्ज तथा पेट फूलने की समस्या स्थायी हो जाती है। [1, 6, 7]

2. ‘आम’ दोष (Toxin Buildup) का निर्माण

बिस्किट एक अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ है जिसमें प्रिजर्वेटिव्स, वनस्पति घी (हाइड्रोजेनेटेड ऑयल) और रिफाइंड शुगर होती है। आयुर्वेद के अनुसार, ऐसे बेक्ड और ड्राई फूड्स को पचाना बहुत भारी होता है, जिससे शरीर में ‘आम’ (बिना पचा हुआ विषैला तत्व) बनने लगता है। यह ‘आम’ रक्त वाहिकाओं और स्रोतों (channels) को ब्लॉक कर देता है। [2, 7, 8, 9]

3. प्रमेह (Type 2 Diabetes / इंसुलिन रेजिस्टेंस)

चाय और बिस्किट दोनों में रिफाइंड शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है। सुबह खाली पेट इनका सेवन करने से ब्लड शुगर अचानक बहुत तेजी से बढ़ता है (Spike) और फिर अचानक गिर जाता है। लंबे समय तक यह आदत बने रहने से शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा होता है जो आगे चलकर डायबिटीज (मधुमेह) का रूप ले लेता है। [6, 10, 11, 12]

4. मोटापा और पेट की चर्बी (Obesity & Stholiya)

मैदा, चीनी और पाम ऑयल का मिश्रण अत्यधिक कैलोरी से भरा होता है। सुबह के समय जब शरीर को पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, तब इसे ‘एंटी-न्यूट्रीएंट्स’ और खाली कैलोरी मिलने से मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है। यह वसा को जमा करने लगता है, जिससे पेट की चर्बी (Belly Fat) और वजन तेजी से बढ़ता है। [4, 7, 8, 10, 13]

5. त्वचा रोग (Skin Issues)

जब चाय के साथ नमकीन बिस्किट या दूध की चाय के साथ नमक वाले तत्वों का मेल होता है, तो आयुर्वेद इसे कड़ा विरुद्ध आहार मानता है। दूध और नमक का यह मिश्रण खून को दूषित (रक्त दृष्टि) करता है, जिससे कील-मुंहासे (Pimples), एक्जिमा और सोरायसिस जैसे त्वचा रोग हो सकते हैं। [2, 14]

6. हृदय रोग (Cardiovascular Risks)

व्यावसायिक बिस्किटों में इस्तेमाल होने वाला ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को बढ़ाता है। यह धमनियों में ब्लॉकेज पैदा कर सकता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। [5, 15, 16, 17]

________________________________________

💡 आयुर्वेद के अनुसार बेहतर विकल्प

यदि आप चाय के शौकीन हैं, तो खाली पेट चाय पीने के बजाय: [18]

• चाय से पहले गुनगुना पानी, सौंफ का पानी या धनिया का पानी पिएं।

• बिस्किट को पूरी तरह छोड़कर उसके स्थान पर भुने हुए चने, मखाने, बादाम या अखरोट जैसी प्राकृतिक चीजों का सेवन करें। [4, 6, 19, 20]

यदि आप चाहें, तो मुझे बता सकते हैं कि:

• आप दिन में कितनी बार चाय-बिस्किट लेते हैं?

• क्या आपको वर्तमान में एसिडिटी या कब्ज जैसी कोई समस्या महसूस हो रही है?

मैं आपकी दिनचर्या के अनुसार एक सही आयुर्वेदिक डाइट प्लान का सुझाव दे सकता हूँ।

Add Your Heading Text Here

Share with