गले के कैंसर के लक्षण

MOUTH AND CERVICAL CANCER

कैंसर शरीर की कोशिकाओं का अनियंत्रित और असामान्य रूप से बढ़ना है, जिससे ट्यूमर बन सकते हैं और स्वस्थ ऊतक (tissues) नष्ट हो सकते हैं।

कैंसर के प्रकार

शरीर में कैंसर 100 से अधिक प्रकार के होते हैं, जिन्हें मुख्य रूप से इन श्रेणियों में बांटा जाता है:

भारत में कैंसर की स्थिति

कैंसर की पहचान (लक्षण)

गले का कैंसर

गले का कैंसर एक व्यापक शब्द है, जिसका उपयोग गले और उससे जुड़े हिस्सों में विकसित होने वाले विभिन्न प्रकार के कैंसर के लिए किया जाता है। यह गले, स्वरयंत्र (लेरिंक्स) या गले के मध्य भाग (ओरोफैरिंक्स) जैसे क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है।

शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य गले की समस्याओं जैसे लग सकते हैं, इसलिए लंबे समय तक रहने वाली गले की खराश, आवाज में बदलाव या निगलने में परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और सही निदान से उपचार की योजना जल्दी शुरू की जा सकती है।

गले के कैंसर का उपचार उसके प्रकार, स्थान और अवस्था पर निर्भर करता है। उपचार में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी, लक्षित उपचार या कुछ मामलों में इम्यूनोथेरेपी शामिल हो सकती है। प्रत्येक रोगी के लिए उपचार का निर्णय विशेषज्ञ डॉक्टर जांच और रिपोर्ट के आधार पर करते हैं।

गले के कैंसर के प्रमुख प्रकार

गले में अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं से कैंसर विकसित हो सकता है। इसके प्रमुख प्रकारों में शामिल हैं:

1. स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा

यह गले और ऊपरी श्वसन-पाचन मार्ग की परत बनाने वाली सपाट कोशिकाओं से विकसित होने वाला सबसे सामान्य प्रकार है। तंबाकू और अत्यधिक शराब का सेवन इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। कुछ मामलों में HPV संक्रमण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

2. एडेनोकार्सिनोमा

यह ग्रंथियों जैसी कोशिकाओं से विकसित होने वाला कैंसर है। यह स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा की तुलना में कम सामान्य होता है और गले के विशेष क्षेत्रों में विकसित हो सकता है।

3. लिंफोमा

लिंफोमा लसीका तंत्र से उत्पन्न होने वाला कैंसर है। यह गले या टॉन्सिल के आसपास के लसीका ऊतकों को प्रभावित कर सकता है। इसके प्रमुख प्रकारों में हॉजकिन और नॉन-हॉजकिन लिंफोमा शामिल हैं।

4. सारकोमा

सारकोमा अपेक्षाकृत दुर्लभ कैंसर है, जो मांसपेशियों, वसा, रक्त वाहिकाओं या अन्य सहायक संयोजी ऊतकों से विकसित हो सकता है।

5. मेलेनोमा

मेलेनोमा वर्णक बनाने वाली कोशिकाओं से उत्पन्न होने वाला कैंसर है। गले में इसका होना दुर्लभ है।


गले के कैंसर के लक्षण

गले के कैंसर के लक्षण व्यक्ति और कैंसर के स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। शुरुआती अवस्था में लक्षण हल्के हो सकते हैं और बाद में अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।

शुरुआती संभावित लक्षण

बीमारी बढ़ने पर दिखाई देने वाले लक्षण

यह ध्यान रखना जरूरी है कि इनमें से किसी भी लक्षण का होना अपने आप में कैंसर की पुष्टि नहीं करता। कई अन्य सामान्य बीमारियों में भी ऐसे लक्षण हो सकते हैं। यदि कोई लक्षण लगातार बना रहता है या बढ़ रहा है, तो डॉक्टर से जांच कराना उचित है।


गले के कैंसर के कारण और जोखिम कारक

गले का कैंसर किसी एक कारण से नहीं होता। कई जोखिम कारक इसके विकास की संभावना बढ़ा सकते हैं।

1. तंबाकू का सेवन

सिगरेट, बीड़ी, सिगार, गुटखा, खैनी और अन्य तंबाकू उत्पादों का लंबे समय तक सेवन गले और मुंह के कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है।

2. शराब का अत्यधिक सेवन

लंबे समय तक अधिक मात्रा में शराब का सेवन गले के कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। तंबाकू और शराब का साथ में सेवन जोखिम को और बढ़ा सकता है।

3. HPV संक्रमण

कुछ प्रकार के ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) संक्रमण, विशेष रूप से HPV-16, गले के कुछ कैंसर से जुड़े पाए गए हैं।

4. उम्र

उम्र बढ़ने के साथ कुछ प्रकार के गले के कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।

5. पोषण और जीवनशैली

लंबे समय तक असंतुलित आहार और खराब पोषण स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं और कुछ कैंसर के जोखिम से जुड़े हो सकते हैं।

6. कार्यस्थल और पर्यावरणीय संपर्क

कुछ औद्योगिक धूल, रसायनों और अन्य हानिकारक पदार्थों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से जोखिम बढ़ सकता है।


गले के कैंसर की अवस्था (Staging)

कैंसर की अवस्था यह बताती है कि बीमारी कितनी फैली हुई है। हालांकि सभी प्रकार के गले के कैंसर की staging एक जैसी नहीं होती, सामान्य रूप से कैंसर को प्रारंभिक से उन्नत अवस्था तक वर्गीकृत किया जाता है।

महत्वपूर्ण: स्टेज IV को कई कैंसरों में IVA, IVB और IVC जैसे उप-चरणों में बांटा जा सकता है, लेकिन यह वर्गीकरण कैंसर के सटीक स्थान और प्रकार पर निर्भर करता है। इसलिए गले के सभी कैंसर के लिए एक ही staging प्रणाली लागू नहीं होती।


गले के कैंसर का निदान

गले के कैंसर की पुष्टि केवल लक्षणों के आधार पर नहीं की जा सकती। डॉक्टर मरीज की शिकायतों, शारीरिक जांच और आवश्यक परीक्षणों के आधार पर निदान करते हैं।

1. एंडोस्कोपी

एक पतली ट्यूब जिसमें कैमरा लगा होता है, उसकी मदद से गले और आसपास के हिस्सों को देखा जाता है। इससे असामान्य ऊतक या घाव की पहचान करने में मदद मिलती है।

2. बायोप्सी

संदिग्ध क्षेत्र से ऊतक का एक छोटा नमूना लिया जाता है और प्रयोगशाला में माइक्रोस्कोप से इसकी जांच की जाती है। कैंसर की पुष्टि के लिए बायोप्सी महत्वपूर्ण परीक्षण है।

3. इमेजिंग जांच

CT स्कैन, MRI या PET-CT जैसी जांचों का उपयोग ट्यूमर के आकार, स्थान और शरीर में बीमारी के फैलाव का आकलन करने के लिए किया जा सकता है।

4. फाइन नीडल एस्पिरेशन (FNA)

यदि गर्दन में लिम्फ नोड या गांठ दिखाई देती है, तो पतली सुई की मदद से कोशिकाओं का नमूना लेकर उसकी जांच की जा सकती है।

5. बेरियम स्वैलो

कुछ मरीजों में निगलने की प्रक्रिया और गले/ग्रासनली की संरचना का आकलन करने के लिए बेरियम वाला तरल पिलाकर एक्स-रे किया जा सकता है।


कब डॉक्टर से संपर्क करें?

यदि गले में खराश, आवाज में बदलाव, निगलने में कठिनाई, गर्दन में गांठ या अन्य संबंधित लक्षण लगातार बने रहें या समय के साथ बढ़ते जाएं, तो ENT विशेषज्ञ या संबंधित चिकित्सक से जांच कराना चाहिए।

गले के कैंसर के लक्षण कई अन्य सामान्य बीमारियों में भी हो सकते हैं। इसलिए स्वयं कैंसर का निष्कर्ष निकालने के बजाय उचित चिकित्सकीय जांच कराना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

समय पर पहचान, सही निदान और उपयुक्त उपचार गले के कैंसर के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।