कम उम्र की महिलाओं (Early Age Females) में गठिया (Arthritis) होना तथा आयुर्वेदिक दृष्टिकोण:
Dr. S M BHATT
VP & MD
GYMNOVEDA HERBAL CARE
AYURVEDIC CONSULTANT
MAYANK CLINIC MEERUT & J K AROGYA CLINIC PRATAPGARH
आज के समय में एक आम समस्या बनती जा रही है। आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में वात दोष (Vata) के बिगड़ने और पाचन क्रिया कमजोर होने से बनने वाले ‘आम’ (Ama – विषैले तत्व) के कारण जोड़ों में दर्द और सूजन शुरू होती है।
महिलाओं में कम उम्र में गठिया होने के मुख्य कारण, लक्षण और संपूर्ण आयुर्वेदिक आहार व उपचार नीचे दिए गए हैं:
महिलाओं में ऑस्टियोआर्थराइटिस का आयुर्वेदिक दृष्टिकोण:
- वात दोष का बढ़ना: आयुर्वेद के अनुसार, बढ़ती उम्र या गलत खान-पान से शरीर में ‘वात’ (वायु और आकाश तत्व) बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ वात जोड़ों में जाकर दर्द, सूजन और अकड़न पैदा करता है।
- मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) का प्रभाव: महिलाओं में मेनोपॉज के बाद हार्मोनल बदलाव (विशेषकर एस्ट्रोजन की कमी) तेजी से होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, यह चरण शरीर में वात को तेजी से बढ़ाता है, जिससे हड्डियां और जोड़ कमजोर होने लगते हैं।
मेनोपॉज़ल ऑस्टियोआर्थराइटिस के मुख्य लक्षण
- संधिशूल (Joint Pain): घुटनों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डियों में लगातार दर्द होना।
- संधिशोथ (Swelling): जोड़ों में सूजन आना।
- स्तंभ (Stiffness): सुबह के समय जोड़ों में अत्यधिक जकड़न महसूस होना।
- हन्ति संधिगति (Restricted Mobility): जोड़ों को मोड़ने या सीधा करने में तीव्र दर्द और कठिनाई।
- धातु क्षय (टिश्यूज का कम होना): उम्र बढ़ने और पोषण की कमी से जोड़ों को चिकनाई देने वाला कफ (श्लेषक कफ) सूखने लगता है। इससे जोड़ों की गद्दी (कार्टिलेज) घिस जाती है और हड्डियों में आपस में रगड़ होने लगती है।
- हार्मोनल बदलाव (Hormonal Imbalance): महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का उतार-चढ़ाव (जैसे प्रेग्नेंसी, मेनोपॉज या PCOD के दौरान) जोड़ों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
- कमजोर पाचन (Mandagni): खाना ठीक से न पचने के कारण शरीर में ‘आम’ (Toxins) बनते हैं, जो खून के साथ मिलकर जोड़ों में जमा हो जाते हैं।
- विटामिन और कैल्शियम की कमी: कम उम्र में ही शरीर में विटामिन D3, B12 और कैल्शियम की भारी कमी होना। ऑटोइम्यून डिसऑर्डर (Autoimmune Disorders): कम उम्र की महिलाओं में रूमेटाइड अर्थराइटिस (Amavata) अधिक देखा जाता है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम खुद ही जोड़ों के टिश्यूज को नुकसान पहुँचाने लगता है।
- गलत जीवनशैली (Lifestyle): शारीरिक निष्क्रियता (Physical Inactivity), लगातार बैठे रहना, और अत्यधिक मानसिक तनाव, जो वात को भड़काता है।
2. शुरुआती लक्षण (Symptoms / Lakshan)
- जोड़ों में सुबह के समय अकड़न (Morning Stiffness): सुबह उठने पर जोड़ों का जाम महसूस होना.
- जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन और लाली आना.
- जोड़ों को हिलाने पर कट-कट की आवाज़ (Cracking Sound) आना.
- बिना भारी काम किए भी अत्यधिक थकान (Fatigue) और सुस्ती महसूस होना.
- हल्के बुखार की अनुभूति होना और भूख कम लगना.
·
3. आयुर्वेदिक आहार (Ayurvedic Diet / Upachar)
गठिया को ठीक करने के लिए पाचन तंत्र को मजबूत करना और वात को शांत करना सबसे जरूरी है।
🟢 क्या खाएं (Recommended Foods)
आहार और जीवनशैली: मेनोपॉज के दौरान महिलाओं को अपने भोजन में कैल्शियम और स्वस्थ वसा बढ़ाने के लिए दूध, घी, तिल और रागी जैसी चीजों को शामिल करना चाहिए। साथ ही, हल्का व्यायाम या योग (जैसे सेतुबंधासन) करना जोड़ों की गतिशीलता बनाए रखने में मदद करता है।
- गर्म और ताजा भोजन: हमेशा हल्का, सुपाच्य और गुनगुना भोजन ही करें।
- एंटी-इंफ्लेमेटरी मसाले: भोजन में हल्दी, अदरक, जीरा, हींग, मेथी दाना और काली मिर्च का प्रयोग जरूर करें।
- अनाज व दालें: पुराना गेहूं, जौ, मूंग की दाल और लाल चावल का सेवन करें।
- हेल्दी फैट्स: जोड़ों की चिकनाई (Lubrication) बनाए रखने के लिए गाय के शुद्ध घी या तिल के तेल का संतुलित इस्तेमाल करें।
- सब्जियां: लौकी, तोरई, कद्दू, और सहजन (Drumstick) जैसी आसानी से पचने वाली सब्जियां खाएं।
- पानी: पूरे दिन में सिर्फ गुनगुना पानी ही पिएं, यह शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालता है।
🔴 क्या न खाएं (Foods to Avoid)
- ठंडी और बासी चीजें: फ्रिज में रखा भोजन, ठंडी छाछ, दही, कोल्ड ड्रिंक्स और आइसक्रीम (ये वात बढ़ाते हैं)।
- सब्जियों में परहेज: टमाटर, बैंगन, आलू, और अरबी (ये सूजन और गैस बढ़ा सकते हैं)।
- जंक और प्रोसेस्ड फूड: मैदा, बेकरी प्रोडक्ट्स, ज्यादा मीठा, तली-भुनी चीजें और पैकेट बंद खाना पूरी तरह बंद कर दें।
4. आयुर्वेदिक उपचार और घरेलू नुस्खे (Ayurvedic Home Remedies)
- मेथी पानी: रात को 1 चम्मच मेथी दाना आधा गिलास पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट इस पानी को पिएं और मेथी के दानों को चबाकर खाएं।
- हल्दी-दूध: रात को सोने से पहले दूध में एक चौथाई चम्मच हल्दी और थोड़ा सा सोंठ (सूखा अदरक) पाउडर मिलाकर पिएं।
- औषधियां (चिकित्सक की सलाह से): आयुर्वेद में अश्वगंधा (ताकत के लिए), MULTIVITAMIN B 12, गुग्गुल (जैसे gymnoveda की पुनर्नवा गुग्गुल) और शल्लकी जोड़ों के दर्द व सूजन को कम करने की बेहतरीन दवाएं हैं।
- बाहरी मालिश और सेक: दर्द वाले जोड़ों पर हल्के हाथों से gymnoveda की बोन पैन ऑइल या तेल से मालिश करें और फिर गर्म कपड़े या अजवाइन की पोटली से सेक (स्वेदन) करें।
- पंचकर्म चिकित्सा: यदि समस्या गंभीर है, तो नजदीकी आयुर्वेदिक केंद्र पर जाकर बस्ती (Medicated Enema) और जानू बस्ती जैसी पंचकर्म थेरेपी कराएं, जो शरीर से वात को जड़ से निकालती हैं।
5. योग और प्राणायाम (Yoga & Exercises)
जोड़ों के लचीलेपन को बनाए रखने के लिए बिना ज्यादा दबाव डाले सूक्ष्म व्यायाम करें।
- प्राणायाम: रोजाना 15-20 मिनट अनुलोम-विलोम और भस्त्रिका प्राणायाम करें, इससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है और दर्द कम होता है।
- आसन: वज्रासन (पाचन के लिए), पवनमुक्तासन (वात नाशक) और भुजंगासन का अभ्यास किसी विशेषज्ञ की देखरेख में करें।
यदि आपको जोड़ों में लगातार दर्द बना रहता है, तो किसी डॉक्टर से मिलकर अपनी प्रकृति (Vata-Pitta-Kapha) के अनुसार सही चिकित्सा योजना जरूर शुरू करें।
BOOK APPOINTMENT WITH DR BHATT
WHATSAPP 8556092620
Gomukhasana, or Cow Face Pose, is a seated yoga posture that stretches the hips, thighs, shoulders, and arms while improving your posture.
गोमुखासन के नुकसान और जोखिम
- घुटनों और कूल्हों में दर्द: यदि आपको घुटनों या कूल्हों (hips) में गंभीर दर्द या चोट है, तो यह आसन जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है जिससे दर्द बढ़ सकता है।
- कंधों की समस्या: कंधे में चोट, रोटेटर कफ टियर (rotator cuff tear) या फ्रोजन शोल्डर जैसी समस्या होने पर हाथों को पीछे की, तरफ मोड़ने से मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ सकता है।
- पीठ या रीढ़ की हड्डी पर असर: स्लिप डिस्क या गंभीर पीठ दर्द (severe backache) से पीड़ित लोगों के लिए यह आसन बिना डॉक्टर या योग गुरु की सलाह के नुकसानदायक हो सकता है।
- गर्भावस्था में जोखिम: गर्भवती महिलाओं को पेट और pelvic क्षेत्र पर दबाव पड़ने के कारण इस आसन से बचने की सलाह दी जाती है।
- टखने और कलाई में खिंचाव: गलत तरीके से बैठने या हाथों को ठीक से न पकड़ने पर टखनों, घुटनों और कलाइयों की नसों में मोच या खिंचाव आ सकता है
How to Do Gomukhasana
मूलाधार स्वाधिसठन चक्र
Heal UTI, PCOS, PANCREASE, PROSTATE, INFERTILITY, HEART BLOCKAGE, LUNGS, THYROID FROZEN SHOULDER


गलत तरीके से या स्वास्थ्य समस्याओं में करने पर सेतुबंधासन (ब्रिज पोज) से गर्दन में खिंचाव, कमर दर्द और मांसपेशियों में ऐंठन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
नुकसान और जोखिम
- गर्दन में खिंचाव: गलत मुद्रा या शरीर पर ज्यादा जोर डालने से गर्दन और सर्वाइकल की मांसपेशियों में दर्द हो सकता है।
- कमर दर्द या अकड़न: कमर को जबरन या अत्यधिक उठाने से निचले हिस्से (लोअर बैक) की नसों पर दबाव पड़ता है, जिससे दर्द बढ़ सकता है।
- चक्कर आना: गलत तरीके से सांस लेने या क्षमता से अधिक देर तक रुकने से सिरदर्द या चक्कर की समस्या हो सकती है।
किन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए (सावधानियां)
- गर्दन या कंधे की चोट:
यदि आपके कंधे, गर्दन या रीढ़ की हड्डी में पुरानी चोट या दर्द है, तो इस आसन से बचें।
कमर की गंभीर समस्या: स्लिप डिस्क या गंभीर पीठ दर्द के मरीज इसे न करें।
- गर्भावस्था: गर्भवती महिलाओं (विशेषकर शुरुआती महीनों में) को योगा विशेषज्ञ की सलाह के बिना यह आसन नहीं करना चाहिए।
- माइग्रेन और उच्च रक्तचाप: माइग्रेन या चक्कर आने की स्थिति में इस अभ्यास से दूर रहना सुरक्षित है।