PLATELET KAM HONE KE LAKSHAN AUR AYURVEDIC UPAY
Dr Bhatt
Ayurvedic consultant Mayank Clinic Meerut
8556092620
प्लेटलेट्स क्या होते हैं?
प्लेटलेट्स (Platelets) रक्त में मौजूद छोटी-छोटी कोशिकाएं होती हैं, जिन्हें थ्रोम्बोसाइट्स भी कहा जाता है। इनका मुख्य कार्य खून को बहने से रोकना और क्षतिग्रस्त टिशू को जल्दी भरना होता है। जब शरीर में किसी कारण कट या चोट लगती है, तो प्लेटलेट्स वहां सक्रिय होकर थक्का बनाते हैं और ब्लीडिंग को रोकते हैं।
सामान्य प्लेटलेट्स की मात्रा:
एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्लेटलेट्स की सामान्य मात्रा 1,50,000 से 4,50,000 प्रति माइक्रोलीटर होती है।
- 1,50,000 से कम होने पर स्थिति को Thrombocytopenia कहा जाता है।
- 4,50,000 से अधिक होने पर इसे Thrombocytosis कहते हैं।
प्लेटलेट्स की कमी के लक्षण (Symptoms of Low Platelets)
प्लेटलेट्स की कमी के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं, जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है:
- छोटी चोट से भी अधिक खून बहना
- नाक या मसूड़ों से बार-बार खून आना
- स्किन पर नीले, बैंगनी या लाल चकत्ते (Petechiae)
- पेशाब या मल में खून आना
- पीरियड्स में अत्यधिक ब्लीडिंग
- थकान, कमजोरी और सिरदर्द
- अंदरूनी ब्लीडिंग की आशंका — जिसमें ब्लैक स्टूल या उल्टी में खून आ सकता है
यदि उपरोक्त लक्षण लगातार दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
शरीर में प्लेटलेट्स कम होना (Thrombocytopenia) एक गंभीर स्थिति हो सकती है, जिसे आयुर्वेद में मुख्य रूप से रक्तपित्त (Raktapitta) से जोड़कर देखा जाता है। प्लेटलेट्स कम होने पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर हो जाती है और रक्तस्राव (Bleeding) का खतरा बढ़ जाता है। [1, 2, 3, 4]
NOTE —
यदि किसी व्यक्ति का प्लेटलेट काउंट 20,000 से कम हो जाता है, तो यह एक मेडिकल इमरजेंसी है। ऐसी स्थिति में आंतरिक रक्तस्राव (Internal Bleeding) का खतरा रहता है। घरेलू या आयुर्वेदिक उपचारों के भरोसे घर पर न बैठें और तुरंत नजदीकी अस्पताल में डॉक्टर से दर भट्ट से फोन पर संपर्क करें ताकि आवश्यकता पड़ने पर दावा भेज जा सके contact 8556092620
नीचे इसके लक्षण, आयुर्वेदिक उपाय और कलर थेरेपी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है।
1. प्लेटलेट कम होने के मुख्य लक्षण (Symptoms)
प्लेटलेट काउंट गिरने पर शरीर में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
- त्वचा पर निशान: त्वचा पर छोटे लाल, नीले या बैंगनी रंग के चकत्ते (Petechiae या Bruises) उभर आना।
- ब्लीडिंग होना: मसूड़ों से खून आना, नाक से खून बहना (Epistaxis) या शौच/यूरिन के रास्ते खून आना।
- अत्यधिक थकान: बिना ज्यादा काम किए शरीर में भारी कमजोरी और सुस्ती महसूस होना।
- घाव से लगातार खून बहना: छोटी सी चोट लगने पर भी खून का थक्का (Clot) न जमना और ब्लीडिंग जारी रहना।
- महिलाओं में समस्या: मासिक धर्म (Periods) के दौरान अत्यधिक और सामान्य से अधिक दिनों तक ब्लीडिंग होना। [5]
प्लेटलेट्स कम होने के मुख्य कारणों और बीमारियों को नीचे श्रेणियों में बांटा गया है:
1. वायरल और संक्रामक रोग (Infections)
संक्रमण के दौरान वायरस या बैक्टीरिया प्लेटलेट्स के उत्पादन को धीमा कर देते हैं या उन्हें सीधे नष्ट कर देते हैं: [1, 2]
- डेंगू बुखार (Dengue): भारत में प्लेटलेट्स गिरने का यह सबसे आम और प्रमुख कारण है।
- मलेरिया और चिकनगुनिया (Malaria & Chikungunya): इन मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों में भी प्लेटलेट्स तेजी से गिरते हैं।
- टाइफाइड (Typhoid): गंभीर बैक्टीरिया जनित बुखार में प्लेटलेट काउंट प्रभावित हो सकता है।
- एचआईवी और हेपेटाइटिस (HIV & Hepatitis C): ये क्रोनिक वायरल संक्रमण बोन मैरो पर सीधा असर डालते हैं। [1, 2]
- सेप्सिस (Sepsis): खून में बैक्टीरिया का संक्रमण पूरी तरह फैल जाने पर प्लेटलेट्स तेजी से खर्च होने लगते हैं。 [1]
2. ऑटोइम्यून बीमारियां (Autoimmune Diseases)
इन बीमारियों में शरीर का इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) भ्रमित होकर अपने ही स्वस्थ प्लेटलेट्स को दुश्मन मानकर नष्ट करने लगता है: [1, 2]
- आईटीपी (ITP – Immune Thrombocytopenic Purpura): यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें बिना किसी अन्य बीमारी के भी इम्यून सिस्टम प्लेटलेट्स को नष्ट करता रहता है। [1]
- ल्यूपस (Lupus / SLE): एक गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी जो शरीर के कई अंगों और रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करती है। [1, 2]
- रुमेटॉइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis): जोड़ों की इस ऑटोइम्यून बीमारी में भी प्लेटलेट्स कम हो सकते हैं। [1, 2]
3. ब्लड कैंसर और बोन मैरो से जुड़े रोग (Bone Marrow & Blood Cancers)
चूंकि प्लेटलेट्स बोन मैरो में बनते हैं, इसलिए वहां होने वाली कोई भी बीमारी उत्पादन ठप कर देती है: [1, 2]
- ल्यूकेमिया (Leukemia): यह एक प्रकार का ब्लड कैंसर है जो स्वस्थ रक्त कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया को रोक देता है।
- लिम्फोमा (Lymphoma): लसीका प्रणाली (Lymphatic system) का कैंसर।
- एप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic Anemia): एक दुर्लभ स्थिति जिसमें बोन मैरो नए ब्लड सेल्स (आरबीसी, डब्ल्यूबीसी और प्लेटलेट्स) बनाना बंद कर देता है।
- मायलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम (Myelodysplastic Syndrome – MDS): इसमें बोन मैरो में दोषपूर्ण और अधूरे ब्लड सेल्स बनते हैं। [1, 2, 3, 4, 5]
4. लिवर और स्प्लीन (प्लीहा) की बीमारियां
- लिवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis): लिवर खराब होने पर स्प्लीन (Spleen) का आकार बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ स्प्लीन खून में से अत्यधिक मात्रा में प्लेटलेट्स को सोखकर अपने अंदर जमा (Trap) कर लेता है, जिससे सर्कुलेशन में प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं। [1]
5. अन्य सामान्य कारण
- पोषक तत्वों की कमी: शरीर में विटामिन B12 और फोलेट (Folic Acid) की भारी कमी होने पर बोन मैरो पर्याप्त प्लेटलेट्स नहीं बना पाता।
- दवाइयों के साइड इफेक्ट्स: कुछ एंटीबायोटिक्स, दिल की दवाएं, मिर्गी की दवाएं, या कीमोथेरेपी (कैंसर का इलाज) की वजह से भी अचानक प्लेटलेट्स गिर जाते हैं।
- अत्यधिक शराब का सेवन: अल्कोहल बोन मैरो के लिए विषैला होता है और प्लेटलेट्स के उत्पादन को धीमा कर देता है।
- गर्भावस्था (Pregnancy): कुछ महिलाओं में गर्भावस्था के अंतिम महीनों में प्लेटलेट्स हल्के कम हो जाते हैं, जो डिलीवरी के बाद सामान्य हो जाते हैं (Gestational Thrombocytopenia)।
2. आयुर्वेदिक उपाय और घरेलू उपचार (Ayurvedic Remedies)
आयुर्वेद में पित्त दोष को शांत करने और खून को शुद्ध करने वाले (Raktashodhana) द्रव्यों का उपयोग किया जाता है:
- पपीते के पत्तों का रस (Papaya Leaf Juice): यह प्लेटलेट्स बढ़ाने का सबसे प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपाय है। पपीते के ताजे पत्तों को पीसकर दिन में दो बार 10-20 मिलीलीटर रस पीने से प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ते हैं।
- गिलोय का रस (Giloy Juice): गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को मजबूत करता है और संक्रमण से लड़कर प्लेटलेट्स के विनाश को रोकता है। इसे पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर या जूस के रूप में लिया जा सकता है।
- ज्वारे का रस (Wheatgrass Juice): व्हीटग्रास में प्रचुर मात्रा में क्लोरोफिल पाया जाता है, जिसकी संरचना हीमोग्लोबिन से मिलती-जुलती होती है। यह प्लेटलेट और रेड ब्लड सेल्स के उत्पादन को बढ़ावा देता है।
- अनार और चुकंदर (Pomegranate & Beetroot): अनार में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और चुकंदर में पाया जाने वाला आयरन रक्त की गुणवत्ता में सुधार करते हैं।
- आंवला और एलोवेरा (Amla & Aloe Vera): विटामिन-सी से भरपूर आंवला और खून को साफ करने वाला एलोवेरा जूस भी नियमित रूप से लिया जा सकता है।
- आयुर्वेदिक औषधियां: गंभीर स्थिति में चिकित्सक की सलाह पर कैशशोर गुग्गुलु, प्रवाल पिष्टी या गिलोय घनवटी जैसी दवाओं का सेवन किया जाता है। [1, 7, 8, 9, 10, 11, 12]
3. कलर थेरेपी (Color Therapy / Chromotherapy)
वैकल्पिक चिकित्सा (Alternative Medicine) और एक्यूप्रेशर के सिद्धांतों के अनुसार, शरीर के ऊर्जा असंतुलन को ठीक करने के लिए रंगों का उपयोग किया जाता है। सुजोक एक्यूप्रेशर और कलर थेरेपी एक्सपर्ट्स के अनुसार:
पंचतत्व आधारित कलर थेरपी ठीक करने के लिए दर भट्ट से संपर्क करें संपर्क सूत्र 8556092620
- उपयोग किए जाने वाले रंग: रक्त और प्लाज्मा (रक्त रस) से जुड़े ऊर्जा केंद्रों को सक्रिय करने के लिए नारंगी (Orange), पीला (Yellow) या काला (Black) रंग इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
- विधि: दोनों हाथों की तर्जनी उंगली (Index Finger) के बीच वाले जोड़ (Middle Joint) पर स्केच पेन की मदद से एक गोल रिंग या चक्र बनाया जाता है। कुछ पद्धतियों में बाएं हाथ की उंगलियों पर काले रंग का बिंदु लगाने का भी निर्देश होता है। [14, 15]
(ध्यान दें: कलर थेरेपी केवल एक पूरक/सपोर्टिव थेरेपी है। इसका कोई ठोस वैज्ञानिक या मुख्यधारा का चिकित्सा आधार नहीं है, इसलिए इसे मुख्य इलाज न मानकर केवल घरेलू उपायों के साथ सहायक के रूप में देखा जा सकता है।) [15]
⚠️ महत्वपूर्ण चेतावनी (Critical Warning)
यदि किसी व्यक्ति का प्लेटलेट काउंट 20,000 से कम हो जाता है, तो यह एक मेडिकल इमरजेंसी है। ऐसी स्थिति में आंतरिक रक्तस्राव (Internal Bleeding) का खतरा रहता है। घरेलू या आयुर्वेदिक उपचारों के भरोसे घर पर न बैठें और तुरंत नजदीकी अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क करें

प्लेटलेट्स बढ़ाने के घरेलू उपाय और आहार (Natural Remedies to Increase Platelets)
- पपीता और इसके पत्ते:
पपीते के पत्तों का रस प्लेटलेट्स को तेजी से बढ़ाता है। दिन में 2 बार इसका सेवन करें।
- चुकंदर:
इसमें भरपूर मात्रा में आयरन और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो प्लेटलेट्स बढ़ाने में मदद करते हैं।
- कीवी और संतरा:
विटामिन C से भरपूर ये फल इम्युनिटी को मजबूत करते हैं और प्लेटलेट्स को नेचुरल रूप से बढ़ाते हैं।
- अनार:
आयरन का बेहतरीन स्रोत है, जो शरीर में खून की मात्रा बढ़ाने के साथ प्लेटलेट्स को भी सुधरता है।
- नारियल पानी:
शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ यह इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होता है, जो रिकवरी में सहायक है।
- पालक और ब्रोकली:
फोलेट और विटामिन K से भरपूर ये हरी सब्जियां प्लेटलेट्स निर्माण में मदद करती हैं।
हेल्दी लाइफस्टाइल टिप्स (Lifestyle Tips to Manage Platelets)
- ज्यादा पानी पिएं, शरीर को हाइड्रेट रखें
- शराब और धूम्रपान से बचें
- तले-भुने और प्रोसेस्ड फूड से परहेज़ करें
- पर्याप्त नींद लें (कम से कम 7-8 घंटे रोज़ाना)
- तनाव से बचें, मेडिटेशन और योग करें
- डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें
- नियमित ब्लड टेस्ट करवाते रहें
प्रमुख आयुर्वेदिक पेटेंट दवाएं (Ready-made Tablets & Syrups)
की
1 ) Platelet plus 120 कैप्सल 750 rs
2) नीम त्रिफला गिलोय जूस 350 rs
3) ब्लड purifier 60 capsule 750 rs
4) triphala gugglu 60 कैप्सल 750 rs
आपका प्लेटलेट काउंट (Platelet Count) कितना है और क्या उन्हें नाक या मसूड़ों से ब्लीडिंग जैसी कोई गंभीर समस्या हो रही है, यह बताएं ताकि मैं अधिक सटीक मार्गदर्शन कर सकूं। व्हाट्सप्प डॉक्टर भट्ट 8556092620
[4] https://www.sukhayuayurved.com/immunology/immune-thrombocytopenia-itp-ayurveda-treatment
[6] https://www.ayuceutical.com/specialized-care/itp
[10] https://www.iafaforallergy.com/blog/increase-your-platelet-count-naturally/
[11] https://ask-ayurveda.com/questions/17793-platelets
[12] https://jaims.in/jaims/article/view/4508/7904
[13] https://www.narayanahealth.org/blog/what-is-colour-therapy