Diabetes and CKD PATIENT
किड्नी फैल  होने के parameter और ckd की संम्पूर्ण जानकारी और आयुर्वेदिक दवाएं
कई  बार जब डाइबीटीज़ बहुत पुराना हो तो किड्नी भी खराब होने लगती है इस अवस्था मे सही जानकारी न होने के कारण हम ऐसी दवा ले लेते हैं  जिसको लेने से हमारी किड्नी पूरु तरह खराब हो जाती है लाखों रुपये खर्च करके भी ckd patient को बचना बहुत मुस्किल होता है आयुर्वेद मे बहुत सारी दवा है जिसको लेने से किड्नी भी ठीक रहती है ज्यादा जानकारी के लिए संपर्क करें


Dr S M BHATT (PhD BHU)
AYURVEDIC DIET, TARANG CHIKITSA EXPERT
NATURAL HEALING AT MAYANK CLINIC MEERUT 8556092620
 
किडनी की कार्यप्रणाली को समझने के लिए eGFR और ACR दोनों टेस्ट एक साथ कराना बेहद जरूरी होता है। ये दोनों टेस्ट किडनी के स्वास्थ्य के दो अलग-अलग पहलुओं को दर्शाते हैं।


1. eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate)
यह एक ब्लड टेस्ट (खून की जांच) है जो यह मापता है कि आपकी किडनी खून से अपशिष्ट (वेस्ट) और अतिरिक्त तरल पदार्थ को कितनी अच्छी तरह छान रही है।
सामान्य स्तर: 90 या उससे अधिक।
चिंता का विषय: यदि eGFR 3 महीने या उससे अधिक समय तक 60 से कम रहता है, तो यह क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) का मुख्य संकेत है।
2. ACR (Albumin-to-Creatinine Ratio)
यह एक यूरिन टेस्ट (पेशाब की जांच) है जो यह देखता है कि आपके पेशाब में एल्ब्यूमिन (एक प्रकार का प्रोटीन) की कितनी मात्रा लीक हो रही है। स्वस्थ किडनी प्रोटीन को खून में ही रखती है, उसे पेशाब में नहीं जाने देती।
सामान्य स्तर: स्वस्थ किडनी में प्रोटीन लीक नहीं होता।
चिंता का विषय: यदि ACR का स्तर 30 mg/g से अधिक आता है, तो यह किडनी की क्षति (एल्ब्यूमिन्यूरिया) को दर्शाता है।

दोनों टेस्ट एक साथ क्यों जरूरी हैं?
शुरुआती बीमारी का पता लगाना: कई बार किडनी में खराबी शुरू होने के बावजूद eGFR का स्तर सामान्य बना रहता है। ऐसी स्थिति में ACR टेस्ट eGFR के घटने से बहुत पहले ही पेशाब में हो रहे सूक्ष्म प्रोटीन रिसाव को पकड़ लेता है।
जोखिम का सही आकलन: कम eGFR छानने की क्षमता में कमी को दिखाता है, जबकि बढ़ा हुआ ACR किडनी के फिल्टर की संरचनात्मक क्षति को दर्शाता है। ये दोनों मिलकर किडनी फेलियर और दिल के दौरे या स्ट्रोक जैसी बीमारियों के खतरे को बढ़ाते हैं।
इलाज और निगरानी: इन दोनों नंबरों को देखकर ही डॉक्टर यह तय कर पाते हैं कि किडनी की बीमारी किस स्टेज (चरण) पर है और उसे सुरक्षित रखने के लिए ACE inhibitors, ARBs या SGLT2 inhibitors जैसी दवाइयों की जरूरत है या नहीं।
 
जब किसी व्यक्ति को डायबिटीज (Diabetes) और हाई ब्लड प्रेशर (High BP) दोनों समस्याएं एक साथ होती हैं, तो कुछ सामान्य दवाएं (विशेषकर बिना डॉक्टर की पर्ची के मिलने वाली या अन्य बीमारियों की दवाएं) उनके ब्लड शुगर या बीपी को खतरनाक रूप से बढ़ा सकती हैं, या किडनी पर बुरा असर डाल सकती हैं। [1, 2]
ऐसी स्थिति में निम्नलिखित दवाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के बिलकुल नहीं लेना चाहिए:
1. बिना डॉक्टर की सलाह के कभी न ली जाने वाली दवाएं
दर्द निवारक दवाएं (NSAIDs): जैसे Ibuprofen, Diclofenac, या Naproxen। ये दवाएं किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं और ब्लड प्रेशर को और बढ़ा देती हैं। [1]
सर्दी-खांसी और बंद नाक की दवाएं (Decongestants): जैसे Pseudoephedrine या Phenylephrine (जो अक्सर कफ सिरप या सर्दी की गोलियों में होती हैं)। ये दवाएं ब्लड शुगर बढ़ाती हैं और अचानक बीपी को बहुत तेज कर सकती हैं। [1, 2]
स्टेरॉयड दवाएं (Corticosteroids): जैसे Prednisone, Dexamethasone। ये दवाएं बहुत कम समय में ब्लड शुगर के स्तर को अत्यधिक बढ़ा देती हैं और बीपी को भी असंतुलित करती हैं। [1, 2]

2. हाई बीपी की कुछ दवाएं जिन्हें डॉक्टर बहुत सावधानी से चुनते हैं
यदि आपको डायबिटीज है, तो आपका डॉक्टर नीचे दी गई बीपी की दवाओं को देने से बच सकता है या बहुत सावधानी से उनकी खुराक तय करेगा:
बीटा-ब्लॉकर्स (Beta-blockers): जैसे Atenolol, Metoprolol। ये दवाएं इंसुलिन के असर को कम कर सकती हैं। इसके अलावा, यह दवा शुगर अचानक बहुत कम होने (Hypoglycemia) के लक्षणों जैसे—दिल की धड़कन तेज होना या घबराहट को छुपा देती है, जिससे मरीज को पता नहीं चल पाता कि उसका शुगर लेवल गिर गया है। [1, 2]
थियाजाइड ड्यूरेटिक्स (Thiazide Diuretics): जैसे Hydrochlorothiazide। यह शरीर से पानी निकालने वाली बीपी की दवा है, लेकिन यह इंसुलिन संवेदनशीलता को कम करके ब्लड शुगर बढ़ा सकती है
CKD स्टेज के अनुसार किडनी का काम और क्षति:
CKD स्टेज
eGFR (काम करने का %)
किडनी की स्थिति (क्षति का स्तर)
स्टेज 1 (CKD 1)
90% या उससे ज़्यादा
मामूली नुकसान (0 से 10% डैमेज): किडनी पूरी तरह से और सामान्य रूप से काम कर रही होती है, लेकिन यूरिन टेस्ट (ACR) या अल्ट्रासाउंड में शुरुआती खराबी (जैसे प्रोटीन लीक होना) दिखाई देती है。
स्टेज 2 (CKD 2)
60% से 89%
हल्का नुकसान (11% से 40% डैमेज): किडनी के काम करने की क्षमता में थोड़ी कमी आती है। आमतौर पर इस स्टेज में भी कोई बाहरी लक्षण महसूस नहीं होते।
स्टेज 3 (CKD 3)
30% से 59%
मध्यम नुकसान (41% से 70% डैमेज): किडनी काफी हद तक प्रभावित हो चुकी होती है। इसके दो भाग होते हैं:
• 3A: 45% से 59% काम
• 3B: 30% से 44% काम
इस स्टेज में थकान या शरीर में हल्की सूजन जैसे लक्षण दिखने शुरू हो सकते हैं।
स्टेज 4 (CKD 4)
15% से 29%
गंभीर नुकसान (71% से 85% डैमेज): किडनी बहुत कम काम कर रही होती है। खून में क्रिएटिनिन और यूरिया का स्तर काफी बढ़ जाता है। इस स्टेज पर डॉक्टर डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की तैयारी शुरू करने की सलाह देते हैं।
स्टेज 5 (CKD 5)
15% से कम
किडनी फेलियर (85% से ज़्यादा डैमेज): इसे ‘एंड-स्टेज रीनल डिजीज’ (ESRD) कहा जाता है। यहाँ किडनी शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में पूरी तरह असमर्थ हो जाती है और मरीज को जीवित रहने के लिए डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की तुरंत आवश्यकता होती है।
 
क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) में किडनी की कार्यप्रणाली (eGFR) को सुधारने और बढ़े हुए क्रिएटिनिन/यूरिया को नियंत्रित करने के लिए आयुर्वेद में दोषों के संतुलन (विशेषकर वात और पित्त) और मूत्रवह स्रोतस (Urinary Channels) के अवरोध को दूर करने पर काम किया जाता है। [1, 2, 3]
चूंकि प्रत्येक मरीज की स्थिति (स्टेज, शुगर, ब्लड प्रेशर, और पोटैशियम का स्तर) अलग होती है, इसलिए किसी भी उपचार को शुरू करने से पहले एक योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करना अनिवार्य है। किडनी रोग के प्रबंधन के लिए मुख्य आयुर्वेदिक औषधियां और आहार (डाइट) योजना नीचे दी गई है: [1, 2]

1. प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियां (Ayurvedic Herbs & Formulations)
आयुर्वेद में किडनी के नेफ्रॉन्स को पुनर्जीवित करने (Regeneration) और शरीर से विषाक्त पदार्थों (Toxic Toxins/Ama) को बाहर निकालने के लिए निम्नलिखित जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है: [1, 2]
पुनर्नवा (Boerhavia diffusa) आश्वगंधा निर्गुंडी और 10 और जड़ी बूटी से बना क्रेयतिनिन कटर जूस : यह किडनी चिकित्सा की सबसे मुख्य जड़ी-बूटी है। यह शरीर की सूजन (Pedal Edema) को कम करती है, पेशाब की मात्रा बढ़ाती है और क्रिएटिनिन के स्तर को कम करने में मदद करती है। [1, 2, 3]
गोक्षुर युक्त किड्नी  केयर जूस (Tribulus terrestris): यह किडनी की छननी प्रणाली (Filtration Barrier) को ताकत देता है और यूरिनरी ट्रैक्ट के इन्फेक्शन व जलन को दूर करता है। [1, 2, 3]
वरुण (Crataeva nurvala) अर्जुन पुनर्नवा युक्त पुनर्नवा गुगगलू : यह धमनियों और किडनी के ब्लॉकेज (Srotorodha) को हटाकर मूत्र मार्ग को साफ करता है। [1]
शास्त्रीय योग (Classical Formulations): मरीजों की स्थिति के अनुसार डॉक्टर अक्सर निम्नलिखित दवाएं निर्धारित करते हैं:
पुनर्नवादि मण्डूर / पुनर्नवादि क्वाथ पुनर्नवा  gugglu (सूजन और एनीमिया को कम करने के लिए)
चंद्रप्रभा वटी (यूरिनरी ट्रैक को मजबूती देने के लिए) के साथ किड्नी केयर और क्रेयतिनिन केयर जूस  https://www.gymnoveda.com/all-products से उपलब्ध है डॉ  भट्ट से भी मँगवा सकते हैं जो बहुत प्रभावी है क्रेयतिनिन को कम करने के लिए
सर्वतोभद्र वटी (पेशाब में प्रोटीन लीक/ACR को रोकने के लिए)
नोट: किडनी के मरीजों में दवा की सटीक खुराक (Dosage) डॉक्टर द्वारा लैब रिपोर्ट देखकर ही तय की जाती है। [1, 2]

2. किडनी-फ्रेंडली आयुर्वेदिक आहार (Diet Plan for CKD)
किडनी रोगों में खान-पान का नियमन ही आधा इलाज माना जाता है। आहार ऐसा होना चाहिए जो किडनी पर अतिरिक्त दबाव (Urea/Creatinine load) न डाले। [1, 2]
क्या खाएं (Pathya):
अनाज: पुराना शाली चावल (चावल का मांड निकालकर), गेहूं, और हल्के अनाज जैसे फॉक्सटेल (कंगनी) या कोदो मिलेट (यह किडनी टिशू को सुरक्षा देने में सहायक हैं)। [1]
सब्जियां: लौकी, तोरई, परवल, कद्दू, और खीरा। (यदि पोटैशियम बढ़ा हुआ है, तो सब्जियों को छोटे टुकड़ों में काटकर, उबालकर पानी फेंक दें – जिसे लीचिंग कहते हैं)।
दालें: केवल मूँग की दाल (छिलके वाली), जो पचने में सबसे हल्की होती है और शरीर में यूरिया नहीं बढ़ाती।
फल: सेब, पपीता और अमरूद (सीमित मात्रा में, यदि डॉक्टर ने अनुमति दी हो)।
आयुर्वेदिक सही दवा का लिंक
https://www.gymnoveda.com/collection/589cab1a-96b7-47d3-8c82-77ef500bbf11/KIDNEY%20CARE%20KIT
https://www.gymnoveda.com/product/dd003f2d-d080-4488-99e0-d49be43d94bd


 
 

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